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Wednesday, January 8, 2020

Samsung at CES 2020: Samsung ने पेश किया Selfie Type, मोबाइल के सेल्फी कैमरे से कर सकेंगे टाइप

January 08, 2020
Los Vegas में चल रहे CES 2020 के पहले दिन Samsung ने कई शानदार प्रोडक्ट्स पेश किए जिनमें टीवी से लेकर Ballie रोबोट तक शामिल हैं। इन्ही में एक नया और इनोवेटिव प्रोडक्ट है Selfie Type। यह ऐसी तकनीक है जो आपके मोबाइल के फ्रंट कैमरे की मदद से टाइपिंग में मदद करेगी और इसके लिए आपको कीबोर्ड की जरूरत भी नहीं होगी। देखने में यह तकनीक पूरी तरह से हॉलीवुड की फिल्मों की तरह है जिसमें Invisible Keyboard की मदद से एक्टर्स टाइपिंग करते देखे जा सकते हैं।
वास्तव में यह सेल्फी के किसी प्रकार जुड़ा प्रोडक्ट नहीं बल्कि नई तकनीक है। यह तकनीक यूजर को उसके स्मार्टफोन में टाइप करने में मदद करेगी वो भी एक ऐसे वर्चुअल की-बोर्ड से जो यूजर के फोन के सेल्फी कैमरा का यूज करेगा। कंपनी का दावा है कि यह सेल्फी टाइप फोन में मौजूद सेल्फी टाइप आर्टीफिशियल इंजन का उपयोग करेगा जो उंगली के इशारों को एनालाइज करेगा। यह इशारे मोबाइल के सेल्फी कैमरे द्वारा रिकॉर्ड किए जाएंगे और उन्हें फिर क्वार्टी की-बोर्ड इनपुट्स की मदद से टेक्स्ट में कनवर्ट कर देगा।
फिलहाल Samsung ने इसे डेमो के तौर पर ही पेश किया है और इसके कमर्शियली लॉन्च करने को लेकर कोई घोषणा नहीं की है। लेकिन इसके डेमो को देखकर लगता है कि भविष्य की तकनीक के लिए यह काफी काम का प्रोडक्ट हो सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की दिशा में बढ़ती कंपनियों की रेस में यह अहम प्रोडक्ट है।
आप भी इसका डेमो वीडियो देखेंगे तो देखते ही रह जाएंगे कि किस तरह यह तकनीक काम करती है।
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Saturday, September 22, 2018

यहां से आप पहचान छिपाकर भेज सकते हैं ईमेल

September 22, 2018
 अगर आप जीमेल, याहू जैसी ईमेल सर्विसेज का इस्तेमाल करते हैं, तो मेल भेजते समय न चाहते हुए भी अपनी पहचान को नहीं छिपा पाएंगे, क्योंकि ईमेल भेजने पर, पाने वाले के ईमेल बॉक्स में सेंडर का ईमेल एड्रेस भी आ जाता है। मगर आजकल बहुत-सी ऐसी ईमेल सर्विसेज हैं, जहां आप अपनी प्राइवेसी को बरकरार रखते हुए किसी को मेल कर सकते हैं।

इसमें आपका ईमेल एड्रेस सामने वाले तक नहीं पहुंचेगा। अपना ईमेल एड्रेस छिपाकर मेल करने की पूरी प्रक्रिया में आपको एनॉनमस ईमेल सर्विसेज की मदद लेनी होगी। यहां पर ट्रैक करना संभव नहीं हो पाता है। हालांकि एनॉनमस ईमेल आईपी एड्रेस को छिपाए बिना संभव नहीं है। इसके लिए आपको टोर या फिर दूसरी प्रॉक्सी या वीपीएन सर्विस का इस्तेमाल करना होगा।

एनक्रिप्टेड/ एनॉनमस ईमेल सर्विस

कुछ ईमेल सर्विस ऐसी हैं, जहां एनॉनमस (अज्ञात) रहकर मेल भेजा और प्राप्त किया जा सकता है। वहीं, कुछ सर्विसेज एनक्रिप्टेड होने के साथ तय समय के बाद मेल खुद-ब-खुद डिलीट हो जाते हैं।

टोरगार्डः यहां पर आपको एनॉनमसइनबॉक्स के साथ प्राइवेसी और क्रिप्टोग्राफी से जुड़े बहुत सारे फीचर्स मिलते हैं। एसएसएल एनक्रिप्शन के जरिए एंड-टू-एंड सिक्योरिटी मिलती है। इसका फायदा यह है कि यह आपकी डिजिटल आइडेंटिटी को छिपा देता है। खासकर अगर आप ईमेल का इस्तेमाल संवेदनशील डाटा भेजने के लिए करते हैं, तो इसका एनक्रिप्शन फीचर किसी तरह के अटैक से सुरक्षा मुहैया कराता है।

गुरिल्ला मेलः यह डिस्पोजेबल व टेम्पररी ईमेल सर्विस मुहैया कराता है। यहां पर साइनअप या रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही, आप 150 एमबी तक की फाइल को अटैच कर भेज सकते हैं। आपके द्वारा भेजा गया मेल एक घंटे के बाद खुद-ब-खुद डिलीट हो जाता है। यहां बस, उस ईमेल एड्रेस की जरूरत होती है, जिसे आप मेल भेजना चाहते हैं। किसी तरह के पर्सनल डाटा की जरूरत नहीं होती है। यह आपके इनबॉक्स को

साफ व सुरक्षित रखता है। इसका एंड्रॉयड एप भी उपलब्ध है।

सिक्योर मेलः आईपी एड्रेस व पहचान छिपाकर मेल करने के लिए इसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है। यह आपके मेल के लिए 4096 बिट कीज का इस्तेमाल करता है। इसके बाद सेंडर औररिसीवर के अलावा, किसी और के लिए मेल को पढ़ना आसान नहीं रह जाता है। सभी ईमेल व एसएमएस एनक्रिप्टेड होते हैं। साथ ही, यह साइनअप के लिए आपकी पर्सनल इंफॉर्मेशन व आइपी एड्रेस भी नहीं मांगता है। कंपनी का दावा है कि वह स्पैम के प्रति जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को अपनाती है।

बिना रजिस्ट्रेशन किए भेजें मेल

अगर आप बिना किसी रजिस्ट्रेशन के ईमेल भेजना चाहते हैं, तो फिर आपको इन ईमेल सर्विसेज का इस्तेमाल करना चाहिए...।

एनॉनमसईमेल डॉट मीः इस प्लेटफॉर्म की खासियत यह है कि यहां पर आपको बस एक फॉर्म मिलता है, जिसमें आपको केवल रिसीवर का एड्रेस, सब्जेक्ट और ईमेल कंटेंट लिखना होता है। अगर ईमेल के साथ कोई फाइल अटैच करना चाहते हैं, तो इसकी सुविधा भी यहां पर है। हां, अगर आपको अपने मेल का जवाब चाहिए, तो फिर अपनी ईमेल आईडी डालनी होगी। इसमें आपको ईमेल ट्रैकिंग की सुविधा भी दी गई है, यानी जब मेल रिसीवर द्वारा ओपन किया जाता है, तो आपको उसकी रियल टाइम में जानकारी मिल जाएगी।

5 वाईमेलः यहां पर एनॉनमस मेल को खूबसूरत फॉर्मेट मेंभेजने की सुविधा मिलती है। यहां रिसीवर के लिए यह पता लगाना नामुमकिन होता है कि मेल कहां से आया है। अगर रिसीवर द्वारा मेल पढ़ लिया जाता है, तो फिर आपको इसकी कन्फर्मेशन भी मिल जाएगी।

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Friday, July 27, 2018

सिर को सुरक्षित ही नहीं, ठंडा भी रखेगा हेलमेट

July 27, 2018
सिर को सुरक्षित ही नहीं, ठंडा भी रखेगा हेलमेट

गर्मी के दिनों में सिर की सुरक्षा के लिए बाइकचालक हेलमेट पहन तो लेते हैं, लेकिन पसीने से उनका हाल बुरा हो जाता है। इसके कारण कई लोग गर्मी में हेलमेट पहनने से कतराने भी लगते हैं। इस परेशानी का हल निकाला है एमिटी के वैज्ञानिक ने।

उन्होंने एक ऐसा पैड तैयार किया है, जिससे हेलमेट का तापमान शरीर के तापमान के बराबर हो जाता है और गर्मी तथा पसीने से राहत मिल जाती है। इस पैड को आसानी से हेलमेट के नीचे रखा भी जा सकता है। इस हेलमेट को एमिटी इंस्टीट्‌यूट ऑफ एडवांस्ड रिसर्च एंड स्टडीज (मटैरियल एंड डिवाइस) के वैज्ञानिक प्रो. वीके जैन ने तैयार किया है।

प्रो. जैन ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि दोपहिया वाहनचालक गर्मियों के मौसम में हेलमेट पहनने से परहेज करते हैं। इससे दुर्घटनाओं में बाइक चालक जान गंवा बैठते हैं। इसलिए यह विचार आया कि क्यों न ऐसा हेलमेट बनाया जाए, जो गर्मी में चालकों को राहत प्रदान कर सके।

हमने एक ऐसा पैड बनाया, जिसे आसानी से हेलमेट में फिट किया जा सकता है। इसे हेलमेट के अंदर दो लेयरों के बीच में रखा जाता है। इससे हेलमेट का तापमान शरीर के तापमान के बराबर हो जाता है। पैड में फेस चेंज नैनो कंपोजिट मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया है। यह पदार्थ 45 से 50 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी प्रभावी तरीके से काम करता है।

पैड में पदार्थ ठोस रूप में होता है। यह इस्तेमाल के समय दो घंटे तक काम करता है। दो घंटे बाद यह पदार्थ तरल में बदल जाता है। खास बात यह है कि इस्तेमाल के बाद इस पैड को बदलने की जरूरत नहीं होती। हेलमेट को किसी छाया वाली जगह में आधे घंटे रखने पर मैटेरियल दोबारा ठोस में तब्दील हो जाता है। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है।

पर्यावरण व शरीर के लिए पूरी तरह अनुकूल

प्रो. जैन का कहना है कि पैड में इस्तेमाल किया जाने वाला पदार्थ पर्यावरण व शरीर के लिए पूरी तरह अनुकूल है। इसमें जिस टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है, वह बिलकुल सुरक्षित है। इससे किसी भी तरह के हानिकारक पदार्थ का उत्सर्जन नहीं होता।

कमर्शियल होने पर बढ़ सकती है क्षमता

जैन ने बताया कि अभी इसे केवल प्रयोग के तौर पर बनाया गया है। कोई कंपनी अगर इस तकनीक पर दिलचस्पी दिखाए तो इसकी इस्तेमाल की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। यानी इसे एक बार में दो घंटे से ज्यादा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

आर्मी से लेकर कामगारों तक के लिए उपयोगी जैन बताते हैं कि इस पैड का इस्तेमाल दोपहिया वाहनचालक तो कर ही सकते हैं, साथ ही सैनिक और कामगारों के लिए भी उपयोगी है। गर्मी और धूप में ड्यूटी के समय यह राहत प्रदान करेगा।
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Thursday, July 26, 2018

गूगल ला रहा 'Titan Security Key', हैकर्स से आपकी सुरक्षा होगी और पुख्ता

July 26, 2018
गूगल ला रहा 'Titan Security Key', हैकर्स से आपकी सुरक्षा होगी और पुख्ता

दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन कंपनी गूगल अपने यूजर्स की सुरक्षा को लेकर अक्सर कदम उठाती रहती है। ऑनलाइन की दुनिया जहां किसी की भी जानकारी एक पल में सार्वजनिक हो सकती है वहां यूजर को ऑनलाइन सुरक्षा देना बड़ी चुनौती है। लेकिन ऐसा लगता है कि कंपनी ने इसका कोई तोड़ निकाल लिया है।

खबरों के अनुसार गूगल ने यूजर्स के लिए 'टाइटन सिक्युरिटी की' लाने की तैयारी कर ली है। यह सुरक्षा चाबी इंटरनेट की दुनिया में यूजर का ना सिर्फ डेटा सुरक्षित रखेगी बल्कि उसे हैकिंग और फिशिंग जैसी चीजों से भी बचाएगी। फिलहाल कंपनी इस चाबी की अपने कर्मचारियों के बीच टेस्टिंग कर रही है और उसका दावा है कि साल 2017 से अब तक उसके 85 हजार से ज्यादा कर्मचारियों में से किसी का डेटा ना तो हैक हुआ है और ना फिशिंग का शिकार हुआ है।

वैसे यह समय काफी कम है लेकिन गूगल जैसी कंपनी हर पल हैकर्स और फिशिर्स के निशाने पर रहती है ऐसे में लगभग एक साल तक कोई अटैक ना होना बड़ी बात माना जा रहा है। गूगल की यह सुरक्षा चाबी पेन ड्राइव और ब्लूटूथ के रूप में आएगी। यह पूरी तरह से फिजिकल सुरक्षा होगी और डेटा को सुरक्षित रखने का एक और बेहतर तरीका होगा।

खबरों के अनुसार गूगल अपने इस नए हथियार को जल्द ही ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध करवाने की तैयारी में है और इसकी कीमत 20-25 डॉलर की बच होने की उम्मीद की जा रही है बेहद कम है।
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Tuesday, July 24, 2018

उपभोक्ता खुद अपने डेटा का मालिक : TRAI

July 24, 2018

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने डाटा प्राइवेसी रूल्स की सिफारिश की है। ट्राई ने कहा कि मौजूदा नियम ग्राहकों की सुरक्षा के लिए काफी नहीं है। दूरसंचार उपभोक्ताओं को अपनी पसंद, सहमति और भूलने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

ट्राई ने सुझाव दिया कि टेलिकॉम कंपनियों अपनी वेबसाइट पर डाटा उल्लंघन की जानकारी का खुलासा करना चाहिए। उपभोक्ताओं के लिए निजता, सुरक्षा, और टेलीकॉम नेटवर्क में डेटा के मालिकाना हक की वकालत करते हुए ट्राई ने कहा कि उपभोक्ता खुद अपने डेटा का मालिक है। इसे नियंत्रित करना, संरक्षित करना उसका मुख्य अधिकार है।

गौरतलब है कि फेसबुक ने अप्रैल में यह स्वीकार किया था कि भारत में करीब 5.62 लाख लोग डाटा चोरी के घोटाले से प्रभावित हुए हैं और यह काम ब्रिटिश कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने बिना किसी की सहमति लिये किया गया है।

इस घोटाले पर फेसबुक ने भारत को सरकार को दिए जवाब में कहा है कि भारत में केवल 335 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। ऐसा उनके एक एप्लीकेशन को इंस्टाल करने के दौरान हुआ है। जबकि 5,62,120 लोग संभवत: उन यूजर्स के फ्रेंड होने के कारण प्रभावित हुए हैं। भारत में फेसबुक के 20 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं।

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Tuesday, July 17, 2018

बंद हो गया याहू मैसेंजर, 90 के दशक में करता था राज

July 17, 2018

इंटरनेट की दुनिया में कभी राज कर चुका याहू मैसेंजर आज इतिहास बन गया है। पिछले 20 सालों से लोगों को जोड़कर रखने वाला यह मैसेंजर आज बंद हो गया। 90 के दशक में युवाओं को इंटरनेट और चैट की दुनिया से वाकिफ कराने वाला यह मैसेंजर व्हाट्सएप और फेसबुक के आगे नहीं टिक पाया। इस दशक के लोग आज भी इस मैसेंजर से जुड़ी अपनी यादें नहीं भूल सके हैं।
दिग्गज अमेरिकी दूरसंचार कंपनी वेराइजन इसे पांच अरब डॉलर (लगभग 33,574 करोड़ रुपए) में सौदा होने के बाद याहू मैसेंजर को बंद करने का फैसला किया गया लेकिन कारण साफ नहीं था। हालांकि, आज से अगले 6 महीने तक यूजर्स अपनी चैट हिस्ट्री यहां से डाउनलोड कर सकेंगे और इस पर क्लिक करते ही यह स्कॉरल पर ले जाएगा। आईए जानते हैं कैसा रहा याहू का यह 20 साल का सफर
ऐसा रहा याहू का सफर
1994
जनवरीः अमेरिका के जेरी यांग और डेविड फिलो ने वर्ल्ड वाइड वेब पर बनाई जेरीज गाइड।
मार्चः इसका नाम बदलकर किया गया याहू।
1995
मार्चः कंपनी के तौर पर याहू का हुआ गठन।
अगस्तः याहू ने लांच की अपनी कॉमर्शियल वेबसाइट। इसमें दी जाती थी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के माध्यम से खबर और चलते थे विज्ञापन।
1996
अप्रैलः आया याहू का आईपीओ।
सितंबरः ब्रिटेन में भी शुरू हुई याहू।
1997
अक्टूबरः याहू ने किया ऑनलाइन डायरेक्टरी कंपनी फोर11 का अधिग्रहण।
1998
जूनः फोर11 की वेबमेल कंपनी रॉकेट मेल बनी याहू मेल। वॉयावेब का किया अधिग्रहण। ऑनलाइन शॉपिंग में मदद करने वाला वेब बेस्ट एप्लीकेशन था यह।
1999
जनवरीः किया वेब होस्टिंग सर्विस कंपनी जीयोसिटीज का अधिग्रहण।
अप्रैलः इंटरनेट रेडियो ब्रॉडकास्ट डॉट का किया अधिग्रहण।
2002
फरवरीः जॉब सर्ज इंजन हॉट-जॉब्स का अधिग्रहण।
दिसंबरः खरीदा सर्च इंजन इंकटोमी।
2003
जूनः टेलीकॉम कंपनी बीटी वर्ल्ड ने मिलाया याहू से हाथ।
2004
जनवरीः नई तकनीक की खोज के लिए याहू रिसर्च लैब बनाने की घोषणा।
मार्चः लांच की सर्च इंजन तकनीक।
दिसंबरः वीडियो सर्च इंजन के परीक्षण के लिए लांच किया बीटा वर्जन।
2008
फरवरीः याहू को खरीदने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने लगाई 44 अरब डॉलर की बोली।
2010
जुलाईः सर्च के लिए याहू ने माइक्रोसॉफ्ट से मिलाया हाथ।
2012
मार्चः पेटेंट के उल्लंघन के लिए याहू ने फेसबुक पर दर्ज कराया मामला। फेसबुक ने भी किया याहू पर केस।
2013
मईः अहम न्यूज ट्वीट्स को प्रदर्शित करने के लिए ट्विटर से साझेदारी।
2014
जुलाईः याहू ने खरीदी मोबाइल कंपनी फ्लरी। वीडियो स्ट्रीमिंग सेवा रेवी का किया अधिग्रहण।
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