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Wednesday, January 8, 2020

Samsung at CES 2020: Samsung ने पेश किया Selfie Type, मोबाइल के सेल्फी कैमरे से कर सकेंगे टाइप

January 08, 2020
Los Vegas में चल रहे CES 2020 के पहले दिन Samsung ने कई शानदार प्रोडक्ट्स पेश किए जिनमें टीवी से लेकर Ballie रोबोट तक शामिल हैं। इन्ही में एक नया और इनोवेटिव प्रोडक्ट है Selfie Type। यह ऐसी तकनीक है जो आपके मोबाइल के फ्रंट कैमरे की मदद से टाइपिंग में मदद करेगी और इसके लिए आपको कीबोर्ड की जरूरत भी नहीं होगी। देखने में यह तकनीक पूरी तरह से हॉलीवुड की फिल्मों की तरह है जिसमें Invisible Keyboard की मदद से एक्टर्स टाइपिंग करते देखे जा सकते हैं।
वास्तव में यह सेल्फी के किसी प्रकार जुड़ा प्रोडक्ट नहीं बल्कि नई तकनीक है। यह तकनीक यूजर को उसके स्मार्टफोन में टाइप करने में मदद करेगी वो भी एक ऐसे वर्चुअल की-बोर्ड से जो यूजर के फोन के सेल्फी कैमरा का यूज करेगा। कंपनी का दावा है कि यह सेल्फी टाइप फोन में मौजूद सेल्फी टाइप आर्टीफिशियल इंजन का उपयोग करेगा जो उंगली के इशारों को एनालाइज करेगा। यह इशारे मोबाइल के सेल्फी कैमरे द्वारा रिकॉर्ड किए जाएंगे और उन्हें फिर क्वार्टी की-बोर्ड इनपुट्स की मदद से टेक्स्ट में कनवर्ट कर देगा।
फिलहाल Samsung ने इसे डेमो के तौर पर ही पेश किया है और इसके कमर्शियली लॉन्च करने को लेकर कोई घोषणा नहीं की है। लेकिन इसके डेमो को देखकर लगता है कि भविष्य की तकनीक के लिए यह काफी काम का प्रोडक्ट हो सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की दिशा में बढ़ती कंपनियों की रेस में यह अहम प्रोडक्ट है।
आप भी इसका डेमो वीडियो देखेंगे तो देखते ही रह जाएंगे कि किस तरह यह तकनीक काम करती है।
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Saturday, September 22, 2018

यहां से आप पहचान छिपाकर भेज सकते हैं ईमेल

September 22, 2018
 अगर आप जीमेल, याहू जैसी ईमेल सर्विसेज का इस्तेमाल करते हैं, तो मेल भेजते समय न चाहते हुए भी अपनी पहचान को नहीं छिपा पाएंगे, क्योंकि ईमेल भेजने पर, पाने वाले के ईमेल बॉक्स में सेंडर का ईमेल एड्रेस भी आ जाता है। मगर आजकल बहुत-सी ऐसी ईमेल सर्विसेज हैं, जहां आप अपनी प्राइवेसी को बरकरार रखते हुए किसी को मेल कर सकते हैं।

इसमें आपका ईमेल एड्रेस सामने वाले तक नहीं पहुंचेगा। अपना ईमेल एड्रेस छिपाकर मेल करने की पूरी प्रक्रिया में आपको एनॉनमस ईमेल सर्विसेज की मदद लेनी होगी। यहां पर ट्रैक करना संभव नहीं हो पाता है। हालांकि एनॉनमस ईमेल आईपी एड्रेस को छिपाए बिना संभव नहीं है। इसके लिए आपको टोर या फिर दूसरी प्रॉक्सी या वीपीएन सर्विस का इस्तेमाल करना होगा।

एनक्रिप्टेड/ एनॉनमस ईमेल सर्विस

कुछ ईमेल सर्विस ऐसी हैं, जहां एनॉनमस (अज्ञात) रहकर मेल भेजा और प्राप्त किया जा सकता है। वहीं, कुछ सर्विसेज एनक्रिप्टेड होने के साथ तय समय के बाद मेल खुद-ब-खुद डिलीट हो जाते हैं।

टोरगार्डः यहां पर आपको एनॉनमसइनबॉक्स के साथ प्राइवेसी और क्रिप्टोग्राफी से जुड़े बहुत सारे फीचर्स मिलते हैं। एसएसएल एनक्रिप्शन के जरिए एंड-टू-एंड सिक्योरिटी मिलती है। इसका फायदा यह है कि यह आपकी डिजिटल आइडेंटिटी को छिपा देता है। खासकर अगर आप ईमेल का इस्तेमाल संवेदनशील डाटा भेजने के लिए करते हैं, तो इसका एनक्रिप्शन फीचर किसी तरह के अटैक से सुरक्षा मुहैया कराता है।

गुरिल्ला मेलः यह डिस्पोजेबल व टेम्पररी ईमेल सर्विस मुहैया कराता है। यहां पर साइनअप या रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही, आप 150 एमबी तक की फाइल को अटैच कर भेज सकते हैं। आपके द्वारा भेजा गया मेल एक घंटे के बाद खुद-ब-खुद डिलीट हो जाता है। यहां बस, उस ईमेल एड्रेस की जरूरत होती है, जिसे आप मेल भेजना चाहते हैं। किसी तरह के पर्सनल डाटा की जरूरत नहीं होती है। यह आपके इनबॉक्स को

साफ व सुरक्षित रखता है। इसका एंड्रॉयड एप भी उपलब्ध है।

सिक्योर मेलः आईपी एड्रेस व पहचान छिपाकर मेल करने के लिए इसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है। यह आपके मेल के लिए 4096 बिट कीज का इस्तेमाल करता है। इसके बाद सेंडर औररिसीवर के अलावा, किसी और के लिए मेल को पढ़ना आसान नहीं रह जाता है। सभी ईमेल व एसएमएस एनक्रिप्टेड होते हैं। साथ ही, यह साइनअप के लिए आपकी पर्सनल इंफॉर्मेशन व आइपी एड्रेस भी नहीं मांगता है। कंपनी का दावा है कि वह स्पैम के प्रति जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को अपनाती है।

बिना रजिस्ट्रेशन किए भेजें मेल

अगर आप बिना किसी रजिस्ट्रेशन के ईमेल भेजना चाहते हैं, तो फिर आपको इन ईमेल सर्विसेज का इस्तेमाल करना चाहिए...।

एनॉनमसईमेल डॉट मीः इस प्लेटफॉर्म की खासियत यह है कि यहां पर आपको बस एक फॉर्म मिलता है, जिसमें आपको केवल रिसीवर का एड्रेस, सब्जेक्ट और ईमेल कंटेंट लिखना होता है। अगर ईमेल के साथ कोई फाइल अटैच करना चाहते हैं, तो इसकी सुविधा भी यहां पर है। हां, अगर आपको अपने मेल का जवाब चाहिए, तो फिर अपनी ईमेल आईडी डालनी होगी। इसमें आपको ईमेल ट्रैकिंग की सुविधा भी दी गई है, यानी जब मेल रिसीवर द्वारा ओपन किया जाता है, तो आपको उसकी रियल टाइम में जानकारी मिल जाएगी।

5 वाईमेलः यहां पर एनॉनमस मेल को खूबसूरत फॉर्मेट मेंभेजने की सुविधा मिलती है। यहां रिसीवर के लिए यह पता लगाना नामुमकिन होता है कि मेल कहां से आया है। अगर रिसीवर द्वारा मेल पढ़ लिया जाता है, तो फिर आपको इसकी कन्फर्मेशन भी मिल जाएगी।

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Friday, July 27, 2018

सिर को सुरक्षित ही नहीं, ठंडा भी रखेगा हेलमेट

July 27, 2018
सिर को सुरक्षित ही नहीं, ठंडा भी रखेगा हेलमेट

गर्मी के दिनों में सिर की सुरक्षा के लिए बाइकचालक हेलमेट पहन तो लेते हैं, लेकिन पसीने से उनका हाल बुरा हो जाता है। इसके कारण कई लोग गर्मी में हेलमेट पहनने से कतराने भी लगते हैं। इस परेशानी का हल निकाला है एमिटी के वैज्ञानिक ने।

उन्होंने एक ऐसा पैड तैयार किया है, जिससे हेलमेट का तापमान शरीर के तापमान के बराबर हो जाता है और गर्मी तथा पसीने से राहत मिल जाती है। इस पैड को आसानी से हेलमेट के नीचे रखा भी जा सकता है। इस हेलमेट को एमिटी इंस्टीट्‌यूट ऑफ एडवांस्ड रिसर्च एंड स्टडीज (मटैरियल एंड डिवाइस) के वैज्ञानिक प्रो. वीके जैन ने तैयार किया है।

प्रो. जैन ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि दोपहिया वाहनचालक गर्मियों के मौसम में हेलमेट पहनने से परहेज करते हैं। इससे दुर्घटनाओं में बाइक चालक जान गंवा बैठते हैं। इसलिए यह विचार आया कि क्यों न ऐसा हेलमेट बनाया जाए, जो गर्मी में चालकों को राहत प्रदान कर सके।

हमने एक ऐसा पैड बनाया, जिसे आसानी से हेलमेट में फिट किया जा सकता है। इसे हेलमेट के अंदर दो लेयरों के बीच में रखा जाता है। इससे हेलमेट का तापमान शरीर के तापमान के बराबर हो जाता है। पैड में फेस चेंज नैनो कंपोजिट मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया है। यह पदार्थ 45 से 50 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी प्रभावी तरीके से काम करता है।

पैड में पदार्थ ठोस रूप में होता है। यह इस्तेमाल के समय दो घंटे तक काम करता है। दो घंटे बाद यह पदार्थ तरल में बदल जाता है। खास बात यह है कि इस्तेमाल के बाद इस पैड को बदलने की जरूरत नहीं होती। हेलमेट को किसी छाया वाली जगह में आधे घंटे रखने पर मैटेरियल दोबारा ठोस में तब्दील हो जाता है। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है।

पर्यावरण व शरीर के लिए पूरी तरह अनुकूल

प्रो. जैन का कहना है कि पैड में इस्तेमाल किया जाने वाला पदार्थ पर्यावरण व शरीर के लिए पूरी तरह अनुकूल है। इसमें जिस टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है, वह बिलकुल सुरक्षित है। इससे किसी भी तरह के हानिकारक पदार्थ का उत्सर्जन नहीं होता।

कमर्शियल होने पर बढ़ सकती है क्षमता

जैन ने बताया कि अभी इसे केवल प्रयोग के तौर पर बनाया गया है। कोई कंपनी अगर इस तकनीक पर दिलचस्पी दिखाए तो इसकी इस्तेमाल की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। यानी इसे एक बार में दो घंटे से ज्यादा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

आर्मी से लेकर कामगारों तक के लिए उपयोगी जैन बताते हैं कि इस पैड का इस्तेमाल दोपहिया वाहनचालक तो कर ही सकते हैं, साथ ही सैनिक और कामगारों के लिए भी उपयोगी है। गर्मी और धूप में ड्यूटी के समय यह राहत प्रदान करेगा।
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Thursday, July 26, 2018

गूगल ला रहा 'Titan Security Key', हैकर्स से आपकी सुरक्षा होगी और पुख्ता

July 26, 2018
गूगल ला रहा 'Titan Security Key', हैकर्स से आपकी सुरक्षा होगी और पुख्ता

दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन कंपनी गूगल अपने यूजर्स की सुरक्षा को लेकर अक्सर कदम उठाती रहती है। ऑनलाइन की दुनिया जहां किसी की भी जानकारी एक पल में सार्वजनिक हो सकती है वहां यूजर को ऑनलाइन सुरक्षा देना बड़ी चुनौती है। लेकिन ऐसा लगता है कि कंपनी ने इसका कोई तोड़ निकाल लिया है।

खबरों के अनुसार गूगल ने यूजर्स के लिए 'टाइटन सिक्युरिटी की' लाने की तैयारी कर ली है। यह सुरक्षा चाबी इंटरनेट की दुनिया में यूजर का ना सिर्फ डेटा सुरक्षित रखेगी बल्कि उसे हैकिंग और फिशिंग जैसी चीजों से भी बचाएगी। फिलहाल कंपनी इस चाबी की अपने कर्मचारियों के बीच टेस्टिंग कर रही है और उसका दावा है कि साल 2017 से अब तक उसके 85 हजार से ज्यादा कर्मचारियों में से किसी का डेटा ना तो हैक हुआ है और ना फिशिंग का शिकार हुआ है।

वैसे यह समय काफी कम है लेकिन गूगल जैसी कंपनी हर पल हैकर्स और फिशिर्स के निशाने पर रहती है ऐसे में लगभग एक साल तक कोई अटैक ना होना बड़ी बात माना जा रहा है। गूगल की यह सुरक्षा चाबी पेन ड्राइव और ब्लूटूथ के रूप में आएगी। यह पूरी तरह से फिजिकल सुरक्षा होगी और डेटा को सुरक्षित रखने का एक और बेहतर तरीका होगा।

खबरों के अनुसार गूगल अपने इस नए हथियार को जल्द ही ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध करवाने की तैयारी में है और इसकी कीमत 20-25 डॉलर की बच होने की उम्मीद की जा रही है बेहद कम है।
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Tuesday, July 24, 2018

उपभोक्ता खुद अपने डेटा का मालिक : TRAI

July 24, 2018

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने डाटा प्राइवेसी रूल्स की सिफारिश की है। ट्राई ने कहा कि मौजूदा नियम ग्राहकों की सुरक्षा के लिए काफी नहीं है। दूरसंचार उपभोक्ताओं को अपनी पसंद, सहमति और भूलने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

ट्राई ने सुझाव दिया कि टेलिकॉम कंपनियों अपनी वेबसाइट पर डाटा उल्लंघन की जानकारी का खुलासा करना चाहिए। उपभोक्ताओं के लिए निजता, सुरक्षा, और टेलीकॉम नेटवर्क में डेटा के मालिकाना हक की वकालत करते हुए ट्राई ने कहा कि उपभोक्ता खुद अपने डेटा का मालिक है। इसे नियंत्रित करना, संरक्षित करना उसका मुख्य अधिकार है।

गौरतलब है कि फेसबुक ने अप्रैल में यह स्वीकार किया था कि भारत में करीब 5.62 लाख लोग डाटा चोरी के घोटाले से प्रभावित हुए हैं और यह काम ब्रिटिश कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने बिना किसी की सहमति लिये किया गया है।

इस घोटाले पर फेसबुक ने भारत को सरकार को दिए जवाब में कहा है कि भारत में केवल 335 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। ऐसा उनके एक एप्लीकेशन को इंस्टाल करने के दौरान हुआ है। जबकि 5,62,120 लोग संभवत: उन यूजर्स के फ्रेंड होने के कारण प्रभावित हुए हैं। भारत में फेसबुक के 20 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं।

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Tuesday, July 17, 2018

बंद हो गया याहू मैसेंजर, 90 के दशक में करता था राज

July 17, 2018

इंटरनेट की दुनिया में कभी राज कर चुका याहू मैसेंजर आज इतिहास बन गया है। पिछले 20 सालों से लोगों को जोड़कर रखने वाला यह मैसेंजर आज बंद हो गया। 90 के दशक में युवाओं को इंटरनेट और चैट की दुनिया से वाकिफ कराने वाला यह मैसेंजर व्हाट्सएप और फेसबुक के आगे नहीं टिक पाया। इस दशक के लोग आज भी इस मैसेंजर से जुड़ी अपनी यादें नहीं भूल सके हैं।
दिग्गज अमेरिकी दूरसंचार कंपनी वेराइजन इसे पांच अरब डॉलर (लगभग 33,574 करोड़ रुपए) में सौदा होने के बाद याहू मैसेंजर को बंद करने का फैसला किया गया लेकिन कारण साफ नहीं था। हालांकि, आज से अगले 6 महीने तक यूजर्स अपनी चैट हिस्ट्री यहां से डाउनलोड कर सकेंगे और इस पर क्लिक करते ही यह स्कॉरल पर ले जाएगा। आईए जानते हैं कैसा रहा याहू का यह 20 साल का सफर
ऐसा रहा याहू का सफर
1994
जनवरीः अमेरिका के जेरी यांग और डेविड फिलो ने वर्ल्ड वाइड वेब पर बनाई जेरीज गाइड।
मार्चः इसका नाम बदलकर किया गया याहू।
1995
मार्चः कंपनी के तौर पर याहू का हुआ गठन।
अगस्तः याहू ने लांच की अपनी कॉमर्शियल वेबसाइट। इसमें दी जाती थी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के माध्यम से खबर और चलते थे विज्ञापन।
1996
अप्रैलः आया याहू का आईपीओ।
सितंबरः ब्रिटेन में भी शुरू हुई याहू।
1997
अक्टूबरः याहू ने किया ऑनलाइन डायरेक्टरी कंपनी फोर11 का अधिग्रहण।
1998
जूनः फोर11 की वेबमेल कंपनी रॉकेट मेल बनी याहू मेल। वॉयावेब का किया अधिग्रहण। ऑनलाइन शॉपिंग में मदद करने वाला वेब बेस्ट एप्लीकेशन था यह।
1999
जनवरीः किया वेब होस्टिंग सर्विस कंपनी जीयोसिटीज का अधिग्रहण।
अप्रैलः इंटरनेट रेडियो ब्रॉडकास्ट डॉट का किया अधिग्रहण।
2002
फरवरीः जॉब सर्ज इंजन हॉट-जॉब्स का अधिग्रहण।
दिसंबरः खरीदा सर्च इंजन इंकटोमी।
2003
जूनः टेलीकॉम कंपनी बीटी वर्ल्ड ने मिलाया याहू से हाथ।
2004
जनवरीः नई तकनीक की खोज के लिए याहू रिसर्च लैब बनाने की घोषणा।
मार्चः लांच की सर्च इंजन तकनीक।
दिसंबरः वीडियो सर्च इंजन के परीक्षण के लिए लांच किया बीटा वर्जन।
2008
फरवरीः याहू को खरीदने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने लगाई 44 अरब डॉलर की बोली।
2010
जुलाईः सर्च के लिए याहू ने माइक्रोसॉफ्ट से मिलाया हाथ।
2012
मार्चः पेटेंट के उल्लंघन के लिए याहू ने फेसबुक पर दर्ज कराया मामला। फेसबुक ने भी किया याहू पर केस।
2013
मईः अहम न्यूज ट्वीट्स को प्रदर्शित करने के लिए ट्विटर से साझेदारी।
2014
जुलाईः याहू ने खरीदी मोबाइल कंपनी फ्लरी। वीडियो स्ट्रीमिंग सेवा रेवी का किया अधिग्रहण।
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Friday, June 29, 2018

मोबाइल से जुड़ी ये 5 गलतफहमियां तुरंत अपने दिमाग से निकाल दें

June 29, 2018
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कोई भी बात किसी भी लॉजिक से साथ अगर कोई बोल दे तो वह बात सभी जगह फैल जाती है। कुछ ऐसा ही तकनीकियों को लेकर भी होता है। मोबाइल से जुड़ी ऐसी कई भ्रांतियां है जिनके बारे में हर कोई बात करता है और उसे फॉलो भी करता है। लेकिन आपको उन बातों को सही मान लेने से पहले जान लेना चाहिए कि कहीं ये कोई मिथ तो नहीं।
ऐसे ही 5 गलतफहमियों को यहां दूर करने की कोशिश की गई है जो कि मोबाइल से जुड़ी हैं:
फोन में जितने ज्यादा बार्स उतने अच्छे सिग्नल
आमतौर पर लोग मानते हैं कि मोबाइल में जितने ज्यादा बार होते हैं, उतना अच्छा सिग्नल होता है। हम सोचते हैं कि इससे हमें कॉल क्वालिटी बहुत अच्छी मिलेगी, आवाज बिलकुल क्लीयर आएगी और बात करने में कोई दिक्कत नही आएगी। लेकिन ऐसा नहीं है। जो आप मोबाइल में सिग्नल बार्स केवल ये बताते हैं कि आपका मोबाइल फोव उस नेटवर्क टावर से कितनी दूरी पर है।
मान लीजिए अगर आप टावर के एकदम पास जा कर फोन कॉल कर रहे हैं और उसी समय आपके उस इलाके में 4 हजार और लोग हैं जो कॉल करने की कोशिश कर रहे हैं तो आपका नेटवर्क एकदम बिजी हो जाएगा और आपको कॉल क्वालिटी एकदम पुअर ही मिलेगी। तो इस गलतफहमी में मत रहिए कि जितने ज्यादा बार्स उतनी अच्छी कॉलिंग।
कैमरे में जितनी ज्यादा मेगापिक्सल्स, उतनी अच्छी फोटो 
जब आप कोई नया स्मार्टफोन खरीदते हैं तो कैमरा स्पेसिफिकेशन आपके इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आप में से ज्यादातर लोग सोचते हैं की जिस मोबाइल के कैमरा में ज्यादा मेगापिक्सल्स होते हैं उसमे फोटो क्वालिटी ज्यादा अच्छी होती है।
ये बात भी बिलकुल गलत है। मेगापिक्सल्स तब ही मायने रखता है जब आप पिक्चर प्रिंट करवाते हैं। वास्तव में फोटो की क्वालिटी मेगापिक्सल्स के अलावा और भी बहुत-सी चीजों पर डिपेंड करती है जैसे कैमरा लेंस, सेंसर, फोकस आदि। एक मेगा पिक्सल्स यानी एक मिलियन पिक्सल्स। पिक्चर्स छोटे-छोटे डॉट्स से बनी होती है जो कि पिक्सल्स कहलाते हैं।
ओवरनाइट चार्जिंग से बैटरी हो सकती है खराब 

आपने कई बार सुना होगा की अपने मोबाइल को रात भर चार्जिंग पर मत लगाइए नही तो आपका फोन खराब हो सकता है या उसकी बैटरी खराब हो सकती है। कुछ लोग ये तक कहते हैं कि फोन ब्लास्ट भी हो सकता है।
हकीकत तो ये हैं कि आप मोबाइल को रातभर चार्ज कर सकते हैं और मान लीजिए कि आपकी बैटरी को कुछ नहीं होगा। इसका कारण यह है कि आजकल के मोबाइल 'स्मार्ट' फोन होते हैं। आपका फोन यह पहचान लेगा कि यह फुल चार्ज हो गया है और खुद ही चार्जिंग बंद कर देगा।
कोई दूसरा या थर्ड पार्ट चार्जर यूज नहीं करना चाहिए 
आपने ये बात कई बार सुनी होगी की अपने फोन को कभी भी किसी दूसरे फोन या कंपनी के चार्जर से चार्ज मत कीजिये, केवल उसी चार्जर का यूज कीजिए जो इस फोन के साथ आया है। ये बात बिलकुल गलत है। आप किसी भी टाइप का चार्जर यूज कर सकते हैं, चाहे वो किसी भी कंपनी का हो बस ध्यान इस बात का रखना है की जो दूसरा चार्जर हो वो डुप्लीकेट या जाली चार्जर ना हो, वो चार्जर एकदम ओरिजनल होना चाहिए बाकि कोई समस्या नही है।
डाटा और कनेक्टिविटी टर्न ऑफ करने से
दो तरह की भ्रांतियां है। आपने ऐसी कई बातें सुनी होगी कि डाटा, वाई-फाई, ब्लूटूथ और जीपीएस बंद करने से आपके बैटरी पर लोड कम होता है। यह भी सलाह दी जाती है कि आपका मोबाइल कम चार्ज हो तो इन्हें टर्न ऑफ करने से कुछ मदद नहीं मिलेगी।
ये बेसिक सिस्टम सर्विसेस है जो कि आपके मोबाइल में ऑन होनी चाहिए ताकि यह स्मूदली काम कर सके।
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Saturday, April 28, 2018

गूगल ने लॉन्च किया Grasshopper ऐप, फोन पर सीख सकेंगे कोडिंग

April 28, 2018
गूगल ने लॉन्च किया Grasshopper ऐप, फोन पर सीख सकेंगे कोडिंग

सर्च इंजन कंपनी गूगल ने अपने यूजर्स के लिए Grasshopper नाम की एक ऐप लॉन्च की है। इस ऐप की मदद से यूजर अपने फोन में कोडिंग सीख सकते हैं। इस ऐप को गूगल वर्कशॉप की एक कोडर्स की टीम ने बनाया है। गूगल ने ऐप को शोध के रूप में लॉन्च किया है।
ऐप को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आप अपने फोन पर कोडिंग की मूल जानकारी पा सकें। ऐप में कई चैलेंजेस और क्विज हैं, जिन्हें आपको हल करना होगा। ऐप बनाने के पीछे का मकसद लोगों को कोडिंग की बेसिक जानकारी देना है। ऐप में आपको हर रोज थोड़ा-थोड़ा समय देना होगा। यहां कई तरह के क्विज और गेम के माध्यम से आपको कोडिंग की जानकारी दी जाएगी।
एक आधिकारिक बयान में कंपनी की तरफ से कहा गया है कि, ‘कोडिंग एक जरूरी स्किल है, हम चाहते हैं कि हर कोई इस स्किल के बारे में जानकारी रखें’। कंपनी की तरफ से आगे कहा गया कि, ‘ हमने Grasshopperको इसलिए बनाया ताकि यूजर्स को कोडिंग की जानकारी दी जा सके और वो भी आसान और मजेदार तरीके से’
Gmail में होंगे ये 6 बड़े बदलाव
इससे पहले एक रिपोर्ट के मुताबिक गूगल ने माना है कि कंपनी Gmail के नए अपग्रेड को लेकर टेस्टिंग कर रही है। रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया गया है कि जल्द गूगल Gmail का नया अपडेट जारी करेगा।
क्या कहा गूगल ने?
एक मीडिया पोर्टल को दिए बयान में गूगल के एक अधिकारी ने माना कि कंपनी Gmail के नए अपडेट को लेकर काम कर रही है। गूगल के अधिकारी के मुताबिक, ‘Gmail के नए फीचर्स को लेकर काम जारी है, ऐसे में अभी कुछ भी कहना सही नहीं है। हां, हम ये मानते हैं कि Gmail के नए फीचर्स पर हमारी टीम काम कर रही है। अपडेट पूरा होने के बाद हम इसके फीचर्स के बारे में बता सकेंगे।
ये होगा बदलाव
जीमेल के नए अपडेट में यूजर्स को कई नए फीचर्स मिल सकते हैं। अपडेट के बाद जीमेल के नए लुक में यूजर्स गूगल कैलेंडर को सीधे जीमेल से ही एक्सेकस कर सकेंगे। इससे आउटलुक का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को काफी आसानी होगी।
ये होंगे नए फीचर्स- जीमेल के नए अपडेट में यूजर्स को ये नए फीचर्स देखने को मिल सकते हैं।
स्नूज
यूजर किसी भी नए मेल को स्नूजज कर सकेंगे। ये फीचर बिल्कुल अलार्म स्नूज की तरह काम करेगा। इस फीचर की मदद से स्नूज किया ईमेल कुछ देर बाद आपके इन बॉक्स में शो करने लगेगा। इस फीचर के कारण यूजर्स उन मेल को इनबॉक्सज से हटा सकेंगे जिनका रिप्लाकइ वो तुरंत नहीं दे सकते हैं।
ऑटो रिप्लाई
नए अपडेट के बाद आइफोन और एंड्रायड के यूजर्स अपने जीमेल में ऑटो रिप्लाई का ऑप्शरन एक्टिव कर सकेंगे।
ऑफलाइन
जीमेल में फलाइन मेल को भी और बेहतर किया जाएगा। गूगल मैप की तरह ही जीमेल में भी ऑफलाइन फीचर को शानदार बनाने को लेकर गूगल की तरफ से काम किया गया है। हालाकि गूगल की तरफ से नई डिजाइन को लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
एप्स पर पहुंचना होगा आसान
नए अपडेट में यूजर्स को एप्स तक पहुंचने के लिए अपना जीमेल नहीं बंद करना पड़ेगा। बल्कि यूजर्स Gmail से G Suite एप्स पर आसानी से पहुंच सकेंगे।
इन बातों के लिए नहीं करना होगा टाइप
इस अपडेट के बाद यूजर्स को मेल का जवाब देने के लिए टाइप करने की जरुरत नहीं होगी. जीमेल यूजर्स को Thank you, Let’s go जैसे जवाब प्री-टाइप्ड ऑप्शन में मिलेंगे।
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मलबे के नीचे दबे लोगों को खोजेगा रोबोट -

April 28, 2018
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भूकंप आने या बम विस्फोट होने पर कई पीड़ित मलबे के नीचे दब रह जाते हैं। राहत एवं बचाव दस्ते के लिए इन्हें खोजना कभी-कभी असंभव हो जाता है। अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन के वैज्ञानिकों ने कीड़े जैसा दिखने वाला रोबोट विकसित किया जो आसानी से अपना आकार बदलकर किसी भी तरह के सुराख में प्रवेश कर सकता है। इसकी मदद से मलबों के ढेर में दबे व्यक्ति को ढूंढ़ना आसान हो जाएगा।
कैटरपिलर (झींगा) की तरह चलने वाले इस रोबोट को बनाने में अत्यंत पतले सेंसर और संवेदनशील आर्टिफिशियल मांसपेशियों का इस्तेमाल किया गया है। इस कारण यह रोबोट हर तरह के वातावरण में काम कर सकता है। रोबोट की ऊष्मीय चालकता बढ़ाने के लिए इसमें कार्बन के सूक्ष्मकणों के साथ क्रिस्टल इलेस्टोमर (रबड़ की तरह का लचीला पॉलीमर) के तरल रूप का प्रयोग किया गया है। इससे रोबोट को सक्रिय करने के लिए उचित ऊष्मा मिल जाती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि 28.6 मिलीमीटर लंबा रोबोट जरूरत अनुसार अपना आकार बढ़ा लेता है। इस रोबोट का कोमल और लचीला होना इसे अन्य पारंपरिक रोबोटों से अलग करता है। युद्ध या आपदा की स्थिति में इसका इस्तेमाल खोज, बचाव, चिकित्सा और पुनर्वास के लिए किया जा सकता है।
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आपके बच्चों की जासूसी कर रहे हैं 3000 से ज्यादा एप्स

April 28, 2018
सौरभ कुमार श्रीवास्तव

बच्चों को मोबाइल दे देने वाले पैरेंट्स सावधान हो जाएं क्योंकि इसके जरिये उनकी जानकारी चुराई जा रही है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद 3,000 से ज्यादा एप्स आपके बच्चों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
ये एप्स आपके बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं साथ ही उनसे जुड़े डाटा को एकठ्ठा कर रहे हैं।ऑटोमेटिड टेस्टिंग प्रोसेस के जरिए शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि गूगल प्ले स्टोर पर करीब 3,337 एप्स हैं, जो बच्चों से जुड़े डाटा को जुटा रहे हैं। ये एप्स परिवार या बच्चों से जुड़े हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों पर नजर रखकर उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना COPPA नियम का उल्लंघन है। इस नियम के तहत 13 साल से छोटे बच्चों का डाटा इक्कठा करना मना है। COPPA का पूरा नाम ‘चिल्ड्रेन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन रूल’ है।
मगर, इसकी अनदेखी कर गूगल प्ले स्टोर पर 3000 हजार से ज्यादा एप्स बच्चों का डाटा चुरा रहे हैं। रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कुल 5,855 एप्स को टेस्ट किया, जिनमें हैरान करने वाले कुछ आंकड़े सामने आए। 256 एप्स यूजर्स की इजाजत के बिना उनके कॉनटैक्ट और लोकेशन की जानकारी जमा कर रहे हैं।
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Tuesday, March 27, 2018

Jio के इस ऑफर से आप कमा सकते हैं 50 हजार रुपए महीना - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

March 27, 2018

 रिलायंस जियो ने लॉन्चिंग के बाद से एक के बाद एक ऑफर पेश कर लोगों के बीच अपनी पैठ बना ली है। पहले फ्री कॉलिंग और फ्री इंटरनेट देने के बाद कंपनी ने काफी किफायती दाम में जो ऑफर पेश किए उससे कई टेलिकॉम ऑपरेटर चौंक गए। कुछ टेलिकॉम कंपनियों को तो बिजनेस बचाने के लिए मर्ज तक होना पड़ा।
अब रिलायंस जियो एक और बड़ा फायदा लोगों के बीच पहुंचाने जा रहा है, जिससे आप हर महीने 50 हजार रुपए तक कमा सकते हैं। यह राशि जगह और इलाकों के साथ कम या ज्यादा हो सकती है। इसके लिए आपको अपने घर की छत पर, प्लॉट या बाजार में नेटरवर्क बढ़ाने के लिए जियो टॉवर को लगवाना होगा।
जियो की वेबसाइट पर लिखा गया है कि रिलायंस जियो यूजर्स डाटा स्पीड और नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं। रिलायंस जीयो इंफोकॉम लिमिटेड ने देश भर में 6000 से अधिक नॉर्थ इंफ्राटेल इंस्टॉल करने का फैसला किया है। इसके बारे में जल्द ही विस्तृत आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
यूजर्स की संख्या 21.5 मिलियन से अधिक हो गई है और यह दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जियो ने घोषणा की कि यह जीयो ने नेटवर्क की गुणवत्ता में सुधार के लिए पूरे देश में 65,000 टावर स्थापित किए जाएंगे। इसलिए, यूजर अपनी इमारतों, गांव या कृषि फार्म में जीओ टॉवर स्थापना के लिए आवेदन कर सकते हैं। आप कार्यकारी को कॉल कर सकते हैं और उन्हें अपना स्थान, गांव, तहसील या जिला पता दे सकते हैं।
जियो 4जी टावर का प्रति माह किराया हर जगह अलग-अलग होगा। यह न्यूनतम पट्टा अवधि, पूर्व-शर्तें आदि के आधार पर तय होगा। फिर भी मोटा-मोटा अनुमान है कि जियो टॉवर का किराया करीब 20 हजार से लेकर 50 हजार रुपए के बीच होगा।
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Tuesday, December 5, 2017

टेलिकॉम कंपनियों को 1 जनवरी 2018 तक इन यूजर्स के नंबर करने होंगे verify - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

December 05, 2017

टेलिकॉम कंपनियों को 1 जनवरी 2018 तक इन यूजर्स के नंबर करने होंगे verify - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

मोबाइल यूजर्स को अपने नंबर को आधार कार्ड से लिंक कराने के लिए अब कहीं जाने की जरुरत नहीं है। यूजर्स यह काम घर बैठे ऑनलाइन भी कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें कस्टमर्स आईवीआर सर्विस का इस्तेमाल करना होगा।
दरअसल, टेलिकॉम डिपार्टमेंट (DoT) ने फॉरेन नेशनल, एनआरआई, सीनियर सिटजंस और दिव्यांग लोगों के लिए आधार को मोबाइल नंबर से लिंक कराने के लिए यह सुविधा पेश की है। आपको बता दें कि यह सुविधा 1 जनवरी 2018 से मिलनी शुरू होगी।
कैसे करें सर्विस का इस्तेमाल?
इस सर्विस के जरिए यूजर्स घर पर बैठे ओटीपी की मदद से अपने नंबर को आधार से लिंक करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें कंपनी के फोन नंबर पर कॉल करना होगा। अब अपनी भाषा का चुनाव कर आधार नंबर देना होगा।
इसके बाद टेलिकॉम कंपनी यह डि‍टेल UIDAI को भेजेगी। नंबर वेरिफिकेशन के लिए आपके नंबर पर एक ओटीपी आएगा। इसे एंटर कर दें। इसके 24 घंटे बाद आपके पास टेलिकॉम कंपनी से कन्फर्मेशन का मैसेज आ जाएगा।
इन यूजर्स को देनी होगी पासपोर्ट डिटेल्स:
डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन्स के अनुसार, जिन यूजर्स (नॉन रेजिडेंट इंडियंस, ओवरसीज इंडियंस और फॉरेन नेशनल्स) के पास आधार कार्ड नहीं हैं उन्हें अपना नंबर री-वेरिफाई कराने के लिए अपने मोबाइल ऑपरेटर के आउटलेट पर जाकर पासपोर्ट की डिटेल्स देनी होंगी।
क्या है डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन्स का कहना?
DoT ने टेलिकॉम कंपनियों को यह निर्देश दिए हैं कि जिन यूजर्स (नॉन-रेसिडेंट इंडियन्स, वरिष्ठ नागरिक (70 वर्ष से अधिक) और दिव्यांग) के पास उनका आधार कार्ड नहीं है या फिर आधार से लिंक मोबाइल नंबर नहीं हैं, उनका नंबर ऑनलाइन सिस्टम के जरिए वेरिफाई किया जाए।

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Wednesday, November 15, 2017

आप भी जानिए आखिर कैसे काम करती है स्मार्टफोन की स्क्रीन - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 15, 2017
आप भी जानिए आखिर कैसे काम करती है स्मार्टफोन की स्क्रीन - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

बदलती तकनीक के साथ स्मार्टफोन के डिस्प्ले पैनल्स में भी काफी बदलाव किए गए हैं। फीचर फोन के छोटे से डिस्प्ले से लेकर OLED, AMOLED, POLED, फ्लैक्सीबल, बेंडेबल डिस्प्ले पैनल टर्मिनोलॉजी में कई बदलाव देखे गए हैं।
लेकिन, क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश की है कि स्मार्टफोन में दिए जाने वाले इन डिस्प्ले में क्या अंतर है? इस खबर में हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि टचस्क्रीन फोन्स में दी जाने वाली स्क्रीन कितने तरह की होती हैं। इससे पहले हम आपको बताएंगे की स्मार्टफोन स्क्रीन में हुए बदलावों पर टेक एक्सपर्ट का क्या कहना है।
टेक एक्सपर्ट विभा सचदेव के अनुसार, 'मोबाइल की स्क्रीन में जबरदस्त इनोवेशन हुए हैं। जहां पहले औसत स्क्रीन साइज 4.7 इंच लोगों की पसंद माना जाता था। वहीं, अब यूजर्स को 5.5 इंच के स्मार्टफोन ज्यादा पसंद आते हैं। हाई रेजोल्यूशन स्क्रीन्स पर कंपनियां ज्यादा फोक्स कर रही हैं। वहीं, स्क्रीन की पावर एफिशियंसी पर भी उतना ही ध्यान दिया जा रहा है। एक्टिव स्क्रीन के बाद अब लोकप्रियता का अगला स्तर फ्लैक्सीबल डिस्प्ले होगा। इसी के चलते कंपनियां एमोलेड डिस्प्ले को ज्यादा बढ़ावा दे रही हैं।'
जानें कितने तरह की होती हैं स्मार्टफोन स्क्रीन - 
TFT LCD: यह डिस्प्ले यूनिट काफी कॉमन है। इसे कई मोबाइल फोन्स में इस्तेमाल किया जाता है। यह डिस्प्ले बेहतर इमेज क्वालिटी और हाई-रेजोल्यूशन देने में सक्षम है। लेकिन धूप में TFT LCD डिस्प्ले साफ दिखाई नहीं देता है। इन्हें ज्यादातर बजट फोन्स और फीचर फोन्स में ही इस्तेमाल किया जाता है।
IPS-LCD: यह डिस्प्ले बजट से ऊपर के स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल किया जाता है। अगर इसकी तुलना TFT डिस्प्ले से की जाए तो IPS LCD फोन में वाइड एंगल व्यू जैसे अनुभव देता है। साथ ही बैटरी की भी कम खपत होती है। इसका हाई-रेजोल्यूशन 640 x 960 पिक्सल है।
Resistive Touchscreen LCD: टचस्क्रीन LCD डिस्प्ले दो तरह के होते हैं। पहला Resistive और दूसरा Capacitive. Resistive टचस्क्रीन में कंडक्टीव मैटेरियल की दो परत दी गई हैं। जब यूजर द्वारा डिस्प्ले को छुआ जाता है तो ये दोनों परत आपस में मिलती हैं और सर्किट बनाती हैं और ऐसे ही यह स्क्रीन काम करती है।
Capacitive Touchsceen LCD: इसमें ट्रांसपेरेंट कंडक्टर के साथ ग्लास की लेयर दी गई होती है। जब इस स्क्रीन को टच किया जाता है तो स्क्रीन की इलेक्ट्रोस्टैटिक फील्ड में रुकावट आती है जिसे फोन का प्रोसेसर डिटेक्ट करता है और फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम को एक्शन को परफॉर्म करने के लिए निर्देश देता है। Resistive स्क्रीन के मुकाबले यह स्क्रीन ज्यादा रिस्पॉन्सिव है। इसे ज्यादातर हाई-एंड स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल किया जाता है।
OLED: यह मोबाइल और मॉनिटर्स में लगने वाली नई तकनीक से लैस डिस्प्ले है। इस डिस्प्ले में ग्लास टॉप प्लेट और ग्लास बॉटम प्लेट के बीच में ऑरगैनिक मैटेरियल की परत दी गई होती है। जब इन दोनों परतों पर इलेक्ट्रिक पल्स लगाई जाती है तो ऑरगैनिक मैटेरियल से इलेक्ट्रो-ल्यूमिनेससेंट लाइट उत्पन्न होती है। इस पर ही स्क्रीन की ब्राइटनेस और कलर निर्भर होते हैं।
AMOLED: यह डिस्प्ले OLED का ही एक प्रकार है। AMOLED में OLED डिस्प्ले की सभी खासियतें जैसे कलर रिप्रोडक्शन, बेहतर बैटरी लाइफ, हाई ब्राइटनेस और शार्पनेस होती हैं। मौजूदा समय में AMOLED डिस्प्ले का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। नोकिय 8 जैसे हाई एंड स्मार्टफोन्स में यह डिस्प्ले दी जा रही है।
Super AMOLED: यह डिस्प्ले AMOLED का ही एडवांस वर्जन है। इसमें टच सेंसर इन बिल्ट होते हैं। मार्किट में मौजूद यह सबसे पतली डिस्प्ले तकनीक है। यह AMOLED डिस्प्ले से कहीं ज्यादा रिस्पॉन्सिव है।
Retina Display: रेटीना डिस्प्ले एक ऐसी टर्म है जो ऐपल ने हाई रेजोल्यूशन (640 x 960) आईपीएस एलसीडी के लिए इस्तेमाल की थी जिसे iPhone4 में इस्तेमाल किया जाता है। इसे रेटीना डिस्प्ले इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके पिकसल्स को व्यक्ति द्वारा पहचाना नहीं जा सकता है।
Haptic/Tactile touchscreen: इस तरह की स्क्रीन का इस्तेमाल ब्लैकबैरी और नोकिया के टचस्क्रीन स्मार्टफोन्स में किया जाता है। यह डिस्प्ले यूजर के परफॉर्मेंस अनुभव और एक्यूरेसी को बेहतर बनाता है।
Gorilla Glass: यह एक अलग तरह का alkali-aluminosilicate ग्लास शील्ड है जिसे डैमेज रेसिस्टेंस बनाया गया है। यह मोबाइल डिस्प्ले को स्क्रैच, टूटने आदि दिक्कतों से बचाता है। कई फोन निर्माता कंपनियां जैसे मोटोरोला, सैमसंग और नोकिया अपने स्मार्टफोन्स को बेहतर बनाने के लिए Gorilla Glass का इस्तेमाल कर रही हैं।
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Monday, November 13, 2017

अब इस मोबाइल ऐप के जरिये मरीज घर बैठे ले पाएंगे डॉक्‍टरी सलाह - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 13, 2017
अब इस मोबाइल ऐप के जरिये मरीज घर बैठे ले पाएंगे डॉक्‍टरी सलाह - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के विशेषज्ञों ने एक ऐसी ऐप तैयार की है जिससे देश या विदेश में बैठे लोग दिल्ली के डॉक्टर्स से परामर्श ले पाएंगे। इस ऐप का नाम My Follow Up है। इस ऐप पर मरीज अपनी क्लीनिकल रिपोर्ट अपलोड कर सकेंगे। साथ ही किफायती शुल्क पर सलाह भी ले पाएंगे।
एक बार डॉक्टर से मिलना होगा जरुरी - 
आपको बता दें कि मरीज जिस बीमारी का इलाज करा रहा है अगर उसे शारीरिक परीक्षण की जरुरत है तो इसके लिए उन्हें एक बार डॉक्टर से मिलना आवश्यक होगा।
गंगाराम अस्पताल में डिपोर्टमेंट आफ मिनिमल एक्सेस एंड बारियाट्रिक सर्जरी सेंटर के को-चेयरमैन डॉ. सुधीर कल्हान ने कहा, 'एक डॉक्टर और एक मरीज के बीच संबंध विश्वास का होता है। हमें इलाज और मरीज के इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। हमने ऐसे मरीजों की कई सर्जरी की हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं लेकिन अब उन्हें सर्जरी के बाद के इलाज के लिए शारीरिक रूप से मौजूद रहने की जरूरत नहीं है।'

इस ऐप को अभी तक करीब 5 हजार लोगों ने डाउनलोड किया है। वहीं, यहां सर गंगाराम अस्पताल के 200 से ज्यादा डॉक्टर प्रीएप्रूव्ड ऑनलाइन अप्वाइंमेंट के लिए उपलब्ध हैं।
गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद हैं कई अन्य एप्स - 
My Follow Up ऐप के अलावा गूगल प्ले स्टोर पर कई अन्य एप्स भी उपलब्ध हैं जिनकी मदद से मरीज डॉक्टर्स से परामर्श ले सकते हैं। इनमें Practo, Doctor On Demand और DocsApp शामिल हैं। इनके अलावा कई ऐसी एप्स भी हैं जिनपर मरीज का prescription अपलोड कर कम कीमत में दवाइयां खरीदी जा सकती हैं। इनमें Netmeds काफी लोकप्रिय ऐप है।
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अपने कर्मचारियों को ऐसे दिलचस्प भत्ते देता है फेसबुक - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 13, 2017
अपने कर्मचारियों को ऐसे दिलचस्प भत्ते देता है फेसबुक - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

हर किसी की तमन्ना होती है कि वो किसी ऐसी कंपनी में काम करे जहां पर उसे सैलरी और अन्य फायदों के साथ-साथ कुछ ऐसी सुविधाएं भी मिलें जो काम करने के माहौल को खुशनुमा बना दें। फेसबुक का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में एक ऐसी ही कंपनी की छवि उभरती है, है न?
फेसबुक काम करने के लिहाज से बेशक एक उम्दा जगह है। मगर, ये कंपनियां बतौर भत्ते अपने कर्मचारियों को कुछ ऐसी पेशकश भी करती हैं जिन्हें सुनकर आपको हैरानी हो सकती है। हम आपको अपनी इस खबर के माध्यम से बताने जा रहे हैं कि फेसबुक कार्यस्थल (ऑफिस) में अपने कर्मचारियों को किस किस तरह के भत्ते प्रदान करता है...
फेसबुक के मेनलो पार्क स्थित कार्यालय में मिलती हैं ड्राई क्लीनिंग सेवाएं
मेनलो पार्क हेडक्वार्टर में इलेक्ट्रिक कारों के लिए निःशुल्क चार्जिंग स्टेशन के साथ निजी सेवक भत्ता
ऑफिस में ही स्वास्थ्य और दंत चिकित्सा सेवाएं
मेनलो पार्क स्थित कार्यालय में ऑन-साइट नाई की दुकान की उपलब्धता
पूरे दिन में मुफ्त में भोजन और स्नैक्स की उपलब्धता
बच्चा गोद लेने के लिए वित्तीय सहायता के साथ साथ नए बच्चे के लिए 4000 डॉलर का बेबी कैश
मेनलो पार्क में श्रमिकों के लिए वीडियो गेम से भरा आर्केड
पूर्णकालिक कर्मचारियों के लिए 21 दिनों का पेड वैकेशन

जिम सदस्यता या अन्य स्वास्थ्य गतिविधियों के लिए एक वेलनेस भत्ता
मेनलो पार्क कर्मचारियों के लिए एक बाइक की मरम्मत की दुकान
हाल ही में माता-पिता बने कर्मचारियों के लिए 4 महीनों का पेड-ऑफ (बच्चे के जन्म लेने और गोद लेने के पहले साल)
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बिना अपनी पहचान बताए ऐसे चला सकते हैं एक सिम से दो नंबर - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 13, 2017
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हम सभी जानते हैं कि स्मार्टफोन में एक सिम कार्ड से आप एक ही नंबर चला सकते हैं। दूसरा नंबर पाने के लिए आपको दूसरी सिम की जरुरत होगी। मगर, आज हम आपको एक ऐसी ट्रिक बताने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप एक सिम से दो नंबर चला सकते हैं। जानते हैं यह कैसे करता है काम।
क्या है तरीका
इस ट्रिक को पूरा करने के लिए आपको सबसे पहले TextMe ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करना होगा। ऐप को स्मार्टफोन में इंस्टॉल करने के बाद आपसे एक्सेस के लिए कुछ परमिशन मांगी जाएगी, जिसे आपको OK करना होगा। इन प्रक्रिया के बाद आपको अपने फेसबुक या गूगल अकाउंट से ऐप के जरिए लॉगइन करना होगा। अगर आप चाहें, तो नया अकाउंट भी बना सकते हैं।
मिलेगा खास मोबाइल नंबर
इन सभी पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद, आप अपने किसी भी दोस्त को कॉल कर सकते हैं। आपके दोस्त के पास एक अलग नंबर से कॉल जाएगा, जो कि सामान्य मोबाइल नंबर जैसा ही होगा। इसके अलावा, आप चाहें तो अपनी पसंद के नंबर को भी चुन सकते हैं।
इसके लिए एप की सेटिंग में जाकर Get Number पर टैप करें या स्क्रीन में सबसे नीचे दिए मेन्यू बार में Numbers पर क्लिक कर अपना नंबर चुने। आपको बता दें कि एक से ज्यादा नंबर का इस्तेमाल करने के लिए आपको भुगतान करना होगा।

एक ही सिम से चलाए दो व्हाट्सएप
ठीक इसी तरह आप अपने फोन में एक ही नंबर से 2 व्हाट्सएप अकाउंट ऑपरेट कर सकते हैं। तो चलिए बताते हैं कैसे काम करती है यह ट्रिक
इसके लिए सबसे पहले आपको 2 Lines for Whatsapp ऐप डाउनलोड करना होगा। ऐप इंस्टॉल होने के बाद इसे अपने एंड्रायड फोन में ओपन करें। आपके पास एक पॉपअप आए,गा जिसे आपको accept करना होगा। इसके बाद आपको Add a new line for Whatsapp पर क्लिक करना है। फिर आपको इसमें अपना नंबर दर्ज करना है। इसके बाद आप एक ही फोन में दो व्हाट्सएप चला पाएंगे।
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Saturday, November 11, 2017

गूगल Files Go ऐप के जरिए बिना डाटा के ब्लूटूथ से होगी फाइल ट्रांसफर - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 11, 2017
गूगल ने अपनी नई ऐप Files Go apk एंड्रॉयड यूजर्स के लिए उपलब्ध करा दी है। इस ऐप के जरिए यूजर्स अपने डाटा को स्टोर और वायरलेस फाइल ट्रांसफर कर पाएंगे। इसे किसी भी थर्ड पार्टी वेबसाइट जैसे APK Mirror के जरिए डाउनलोड किया जा सकता है।

गूगल ने अपनी नई ऐप Files Go apk एंड्रॉयड यूजर्स के लिए उपलब्ध करा दी है। इस ऐप के जरिए यूजर्स अपने डाटा को स्टोर और वायरलेस फाइल ट्रांसफर कर पाएंगे। इसे किसी भी थर्ड पार्टी वेबसाइट जैसे APK Mirror के जरिए डाउनलोड किया जा सकता है।
इसे एंड्रॉयड 5.0 या उससे ऊपर के वर्जन वाले स्मार्टफोन पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
ऐसा है Files Go ऐप का इंटरफेस-
इस ऐप का इंटरफेस काफी आसान है। इसमें दो टैब दिए गए हैं, जिनमें से एक स्टोरेज और दूसरा फाइल है। स्टोरेज टैब में आपकी डिवाइस में कितना स्पेस मौजूद है, इसकी जानकारी मिलेगी। साथ ही यहां से आप कैशे और रिकॉर्डेड मीडिया को डिलीट कर पाएंगे। ऐसा करने से फोन में स्टोरेज की समस्या नहीं होगी।
इसके अलावा फाइल टैब एक मैनेजमेंट ऐप की तरह काम करेगा। इसमें फोन में मौजूद डाउनलोड्स, रिसीव फाइल, इमेज, वीडियो और डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट दी गई होगी।
Files Go ऐप के फीचर्स-
दो टैब्स के अलावा इसमें फाइल ट्रांसफर फीचर दिया गया है। यह फाइल्स को वायरलेस तरीके से सेंड और रिसीव करने में मदद करता है। इसके लिए एक्टिव डाटा कनेक्शन के बजाए फोन के ब्लूटूथ की मदद ली जाती है। Superbeam और Pushbullet जैसी फाइल शेयरिंग ऐप की ही तरह इसमें भी यूजर्स बड़ी फाइल्स को तेजी से सेंड और रिसीव कर सकते हैं।
इसके अलावा भी कई एप्स हैं, जिसके जरिए यूजर्स स्मार्टफोन से फाइल ट्रांसफर कर सकते हैं।
Superbeam से होती है फाइल ट्रांसफर-
यह ऐप एंड्रॉयड और iOS यूजर्स इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें दो स्मार्टफोन्स के बीच फाइल एक्सचेंज करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करना होता है या फिर NFC पेयरिंग करनी होती है।
Pushbullet ऐप भी है काम का-
इस ऐप से फाइल ट्रांसफर करने के लिए दोनों स्मार्टफोन में Pushbullet ऐप का होना जरुरी है। इसके जरिए फोटोज, स्क्रीनशॉट्स आदि को शेयर किया जा सकता है। यह ऐप एंड्रॉयड और iOS यूजर्स इस्तेमाल कर सकते हैं।
Xender से भी होती है फाइल ट्रांसफर-
इसमें यूजर्स को ऑन-स्क्रीन स्टेप्स को फॉलो कर वाई-फाई हॉटस्पॉट बनाना होगा। इसके बाद फाइल शेयरिंग की जा सकती है। यह ऐप एंड्रॉयड और iOS यूजर्स इस्तेमाल कर सकते हैं।
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