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Saturday, July 28, 2018

एयरटेल पेमेंट बैंक को नए ग्राहक बनाने की मिली अनुमति

July 28, 2018
एयरटेल पेमेंट बैंक को नए ग्राहक बनाने की मिली अनुमति

एयरटेल पेमेंट बैंक को नए ग्राहक जोड़ने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से अनुमति मिल गई है। आधार जारी करने वाली यूआइडीएआइ ने भी नए ग्राहकों के लिए 12 अंकों का आधार आधारित ई-केवाईसी के इस्तेमाल के लिए भी अनुमति दे दी है। करीब सात महीने पहले एयरटेल के ग्राहकों को कथित तौर पर उनकी सहमति के बिना एयरटेल पेमेंट बैंक का ग्राहक बनाने को लेकर वह विवादों में आ गई थी।

रिजर्व बैंक और यूआइडीएआइ से अनुमति मिलने की जानकारी एयरटेल पेमेंट बैंक ने एक बयान के जरिये दी है। सात महीने पहले एयरटेल और उसका पेमेंट बैंक उस समय मुश्किल में आया था जब कथित तौर पर एयरटेल के ग्राहकों का खाता उनकी अनुमति के बगैर बैंक में खोल दिया गया और उनकी एलपीजी सब्सिडी का पैसा उसमें जमा होने लगा। इस तरह करोड़ों रुपये की सब्सिडी इन खातों में जमा हो गई।

यह मामला सामने आने के बाद रिजर्व बैक ने एयरटेल पेमेंट बैंक को नए ग्राहक बनाने से रोक दिया था और यूआइडीएआइ ने एयरटेल और उसके पेमेंट बैंक का ई-केवाईसी लाइसेंस रद्द कर दिया था। हालांकि कंपनी ने किसी भी गड़बड़ी से इन्कार किया था और दिशानिर्देशों का पालन करने की बात कही थी।

आआइडीएआइ ने इस साल मार्च में एयरटेल को अपने ग्राहकों का आधार के जरिये सत्यापन करने की अनुमति दे दी। लेकिन पेमेंट बैंक का ई-केवाईसी लाइसेंस बहाल नहीं किया था। बैंक के बयान के अनुसार उसे रिजर्व बैंक से नए ग्राहकों को जोड़ने की आवश्यक मंजूरी मिल गई है। उसने बताया कि यूआइडीएआइ ने भी आधार आधारित ई-केवाईसी का इस्तेमाल करके नए ग्राहक बनाने की अनुमति दे दी है।

बैंक ने कहा है कि वह वित्तीय समावेशन और सभी को बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के सरकार के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है। पेमेंट बैंक दूसरे सामान्य बैंकों की तरह बैंकिंग सेवाएं दे सकते हैं। लेकिन उनके लेनदेन छोटी रकम के ही होंगे और वे कोई कर्ज नहीं दे सकेंगे। हालांकि इन बैंकों को एक लाख रुपये डिपॉजिट लेने की अनुमति है।

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Friday, July 27, 2018

सैमसंग गैलेक्सी नोट 9 की तस्वीरें हुई लीक, इन कलर्स में आएगा स्मार्टफोन

July 27, 2018
सैमसंग गैलेक्सी नोट 9 की तस्वीरें हुई लीक, इन कलर्स में आएगा स्मार्टफोन

सैमसंग अपने लेटेस्ट स्मार्टफोन गैलेक्सी नोट 9 को अगले महीने यानी 9 अगस्त को एक शानदार इवेंट के माध्यम से लॉन्च करेगा। लेकिन इससे पहले इसकी तस्वीरें लीक हुई हैं। अगर इन पर यकीन करें तो गैलेक्सी नोट 9 ब्लैक के अलावा डीप सी ब्लू और ब्राउन कलर वेरिएंट में भी आने वाला है। ब्लू कलर वाले वेरिएंट का एस पेन पीले रंग में होगा।

पिछले कुछ दिनों से लगातार गैलेक्सी नोट 9 की अलग-अलग तस्वीरें लीक हो रहीं हैं। बताया जा रहा है कि गैलेक्सी नोट 9 पांच कलर्स में आएगा जिनमें ब्लैक, ब्लू, ब्राउन के अलावा ग्रे और पर्पल भी शामिल है। कुछ दिनों से यह स्मार्टफोन पर्पल कलर में स्पॉट हो रहा था।

खबरों के अनुसार गैलेक्सी नोट 9 के हर कलर वेरिएंट का कस्टमाइस्ड स्टाइलस है। नई तस्वीरों में हर गैलेक्सी नोट के साथ कलर्ड एस पेन भी नजर आ रहे हैं। नोट 9 का डिजाइन गैलेक्सी नोट 8 की तरह ही होने की बात कही जा रही है। यह 6.38 इंच की स्क्रीन के साथ आएगा जिसमें स्नैपड्रैगन 845/झायनोज9810 प्रोसेसर लगा है साथ ही 4000 एमएएच की बैटरी है।

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Saturday, April 28, 2018

Facebook यूजर का डाटा अब नहीं चुरा पाएंगे थर्ड पार्टी ऐप

April 28, 2018
Facebook यूजर का डाटा अब नहीं चुरा पाएंगे थर्ड पार्टी ऐप

किसी ऐप में लॉग इन के लिए हम अक्सर फेसबुक का सहारा ले लेते हैं। यह हमारे लिए आसान होता है क्योंकि केवल एक कंफर्म बटन दबाकर हम उस ऐप में साइन इन कर लेते हैं। लेकिन ऐसा करते वक्त हम यह भूल जाते हैं कि अनजाने में उस ऐप को हमारी सारी जानकारी मिल जाती है। कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा की गई डाटा चोरी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस ब्रिटिश कंपनी ने अमेरिकी चुनाव और ब्रेक्जिट (यूरोपीयन यूनियन से बाहर होने के लिए ब्रिटेन में कराए गए जनमत संग्रह) में दखल देने के लिए क्विज ऐप के जरिये फेसबुक यूजर का डाटा चोरी किया था।
अब कोई भी थर्ड पार्टी ऐप ऐसा ना कर पाए इसके लिए फेसबुक ने कवायद शुरू कर दी है। फेसबुक ने मंगलवार को एक पोस्ट के जरिये कहा, "बुधवार से बनाए गए ऐप को फेसबुक पर लॉग इन किए यूजर की तरह पोस्ट डालने की अनुमति नहीं होगी। जिन ऐप को पहले ही इसकी अनुमति मिल चुकी है वह केवल एक अगस्त तक इसका इस्तेमाल कर पाएंगे। आगे डेवलप किए जाने वाले ऐप को अपने पोस्ट डालने की अनुमति के लिए ऐप रिव्यू से गुजरना पड़ेगा।"
फेसबुक के इस कदम के बाद कोई भी यूजर के डाटा का इस्तेमाल उनकी मंजूरी के बगैर नहीं कर पाएगा। यह सुविधा इंस्टाग्राम के यूजर के लिए भी लागू की गई है। फेसबुक ने कहा, "इस बदलाव के कारण किसी कमेंट में दिया गया यूजर का नाम और ब्योरा हट जाएगा।" विशेषज्ञों का हालांकि कहना है कि अब भी सात थर्ड पार्टी वेबसाइट फेसबुक यूजर के डाटा को एक्सिस करने के अधिकार का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।
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आपके बच्चों की जासूसी कर रहे हैं 3000 से ज्यादा एप्स

April 28, 2018
सौरभ कुमार श्रीवास्तव

बच्चों को मोबाइल दे देने वाले पैरेंट्स सावधान हो जाएं क्योंकि इसके जरिये उनकी जानकारी चुराई जा रही है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद 3,000 से ज्यादा एप्स आपके बच्चों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
ये एप्स आपके बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं साथ ही उनसे जुड़े डाटा को एकठ्ठा कर रहे हैं।ऑटोमेटिड टेस्टिंग प्रोसेस के जरिए शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि गूगल प्ले स्टोर पर करीब 3,337 एप्स हैं, जो बच्चों से जुड़े डाटा को जुटा रहे हैं। ये एप्स परिवार या बच्चों से जुड़े हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चों पर नजर रखकर उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना COPPA नियम का उल्लंघन है। इस नियम के तहत 13 साल से छोटे बच्चों का डाटा इक्कठा करना मना है। COPPA का पूरा नाम ‘चिल्ड्रेन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन रूल’ है।
मगर, इसकी अनदेखी कर गूगल प्ले स्टोर पर 3000 हजार से ज्यादा एप्स बच्चों का डाटा चुरा रहे हैं। रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने कुल 5,855 एप्स को टेस्ट किया, जिनमें हैरान करने वाले कुछ आंकड़े सामने आए। 256 एप्स यूजर्स की इजाजत के बिना उनके कॉनटैक्ट और लोकेशन की जानकारी जमा कर रहे हैं।
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Monday, March 26, 2018

Whatsap एंड्रॉयड बीटा वर्जन पर लाया QR कोड पेमेंट्स फीचर - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

March 26, 2018
Whatsap एंड्रॉयड बीटा वर्जन पर लाया QR कोड पेमेंट्स फीचर - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

व्हाट्सएप के UPI फीचर का यूजर्स को फरवरी महीने से इंतजार था। अब यह पेमेंट फीचर लेटेस्ट एंड्रॉयड बीटा वर्जन पर रोल आउट हो गया है।
एंड्रॉयड बीटा वर्जन के व्हाट्सएप पर QR कोड पेमेंट विकल्प उपलब्ध करा दिया गया है। जैसा कि नाम से पता चलता है, इस फीचर की मदद से QR कोड स्कैन करने पर पेमेंट की जा सकेगी। इससे पेमेंट करना आसान हो जाएगा।
यहां आएगा नया फीचर - 
व्हाट्सएप के लेटेस्ट एंड्रॉयड बीटा वर्जन 2.18.93 पर QR कोड फीचर उपलब्ध करवाया गया है। इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। अगर आपने अपने व्हाट्सएप पर व्हाट्सएप पेमेंट विकल्प को पहले से इनेबल किया हुआ है तो आप सेटिंग्स में पेमेंट्स विकल्प में जा सकते हैं। इसके अंतर्गत स्क्रॉल कर के नए पेमेंट मेथड का चयन किया जा सकता है। यहां आपको दो विकल्प मिलेंगे। 
पहला विकल्प, UPI ID का होगा और दूसरा, स्कैन QR कोड का विकल्प होगा। दूसरे विकल्प का चयन करने के बाद आपके सामने QR कोड स्कैनिंग स्क्रीन आ जाएगी। 
इसके बाद आपसे पूछा जाएगा की आप कितनी राशि भेजना चाहते हैं? इसी के साथ आपसे वेरिफिकेशन के लिए UPI पिन भी मांगा जाएगा।
सेंड टू UPI आईडी फीचर भी उपलब्ध - 
व्हाट्सएप पेमेंट फीचर को फरवरी में एंड्रॉयड यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया गया था। UPI पर आधारित पेमेंट फीचर की मदद से यूजर्स अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में से लोगों को पैसे भेज सकते हैं।
इस फीचर के रोल आउट के बाद पेटीएम ने व्हाट्सएप पर UPI पेमेंट के दिशानिर्देशों का पालन ना करने का आरोप लगाया था। इस आलोचना के बाद व्हाट्सएप ने UPI ID पेमेंट विकल्प को रोल आउट किया था। इस फीचर को सेंड टू UPI आईडी का नाम दिया गया था।
इस फीचर के तहत यूजर्स सीधा UPI आईडी पर ही पैसे भेज पाएंगे। एक दिन में व्हाट्सएप UPI के जरिये 20 UPI पेमेंट और 1 लाख रुपए तक भेजे जा सकते हैं।
अगर आप व्हाट्सएप QR कोड पेमेंट विकल्प का व्हाट्सएप पर प्रयोग करना चाहते हैं तो आपको गूगल प्ले स्टोर पर जाकर लेटेस्ट वर्जन 2.18.93 डाउलोड करना होगा। अभी के लिए यह फीचर सिर्फ बीटा यूजर्स के लिए उपलब्ध है। उम्मीद है की इसे इसे जल्द ही ऐप के स्टेबल वर्जन पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
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Tuesday, December 5, 2017

टेलिकॉम कंपनियों को 1 जनवरी 2018 तक इन यूजर्स के नंबर करने होंगे verify - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

December 05, 2017

टेलिकॉम कंपनियों को 1 जनवरी 2018 तक इन यूजर्स के नंबर करने होंगे verify - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

मोबाइल यूजर्स को अपने नंबर को आधार कार्ड से लिंक कराने के लिए अब कहीं जाने की जरुरत नहीं है। यूजर्स यह काम घर बैठे ऑनलाइन भी कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें कस्टमर्स आईवीआर सर्विस का इस्तेमाल करना होगा।
दरअसल, टेलिकॉम डिपार्टमेंट (DoT) ने फॉरेन नेशनल, एनआरआई, सीनियर सिटजंस और दिव्यांग लोगों के लिए आधार को मोबाइल नंबर से लिंक कराने के लिए यह सुविधा पेश की है। आपको बता दें कि यह सुविधा 1 जनवरी 2018 से मिलनी शुरू होगी।
कैसे करें सर्विस का इस्तेमाल?
इस सर्विस के जरिए यूजर्स घर पर बैठे ओटीपी की मदद से अपने नंबर को आधार से लिंक करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें कंपनी के फोन नंबर पर कॉल करना होगा। अब अपनी भाषा का चुनाव कर आधार नंबर देना होगा।
इसके बाद टेलिकॉम कंपनी यह डि‍टेल UIDAI को भेजेगी। नंबर वेरिफिकेशन के लिए आपके नंबर पर एक ओटीपी आएगा। इसे एंटर कर दें। इसके 24 घंटे बाद आपके पास टेलिकॉम कंपनी से कन्फर्मेशन का मैसेज आ जाएगा।
इन यूजर्स को देनी होगी पासपोर्ट डिटेल्स:
डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन्स के अनुसार, जिन यूजर्स (नॉन रेजिडेंट इंडियंस, ओवरसीज इंडियंस और फॉरेन नेशनल्स) के पास आधार कार्ड नहीं हैं उन्हें अपना नंबर री-वेरिफाई कराने के लिए अपने मोबाइल ऑपरेटर के आउटलेट पर जाकर पासपोर्ट की डिटेल्स देनी होंगी।
क्या है डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन्स का कहना?
DoT ने टेलिकॉम कंपनियों को यह निर्देश दिए हैं कि जिन यूजर्स (नॉन-रेसिडेंट इंडियन्स, वरिष्ठ नागरिक (70 वर्ष से अधिक) और दिव्यांग) के पास उनका आधार कार्ड नहीं है या फिर आधार से लिंक मोबाइल नंबर नहीं हैं, उनका नंबर ऑनलाइन सिस्टम के जरिए वेरिफाई किया जाए।

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Wednesday, November 15, 2017

आप भी जानिए आखिर कैसे काम करती है स्मार्टफोन की स्क्रीन - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 15, 2017
आप भी जानिए आखिर कैसे काम करती है स्मार्टफोन की स्क्रीन - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

बदलती तकनीक के साथ स्मार्टफोन के डिस्प्ले पैनल्स में भी काफी बदलाव किए गए हैं। फीचर फोन के छोटे से डिस्प्ले से लेकर OLED, AMOLED, POLED, फ्लैक्सीबल, बेंडेबल डिस्प्ले पैनल टर्मिनोलॉजी में कई बदलाव देखे गए हैं।
लेकिन, क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश की है कि स्मार्टफोन में दिए जाने वाले इन डिस्प्ले में क्या अंतर है? इस खबर में हम आपको यह बताने जा रहे हैं कि टचस्क्रीन फोन्स में दी जाने वाली स्क्रीन कितने तरह की होती हैं। इससे पहले हम आपको बताएंगे की स्मार्टफोन स्क्रीन में हुए बदलावों पर टेक एक्सपर्ट का क्या कहना है।
टेक एक्सपर्ट विभा सचदेव के अनुसार, 'मोबाइल की स्क्रीन में जबरदस्त इनोवेशन हुए हैं। जहां पहले औसत स्क्रीन साइज 4.7 इंच लोगों की पसंद माना जाता था। वहीं, अब यूजर्स को 5.5 इंच के स्मार्टफोन ज्यादा पसंद आते हैं। हाई रेजोल्यूशन स्क्रीन्स पर कंपनियां ज्यादा फोक्स कर रही हैं। वहीं, स्क्रीन की पावर एफिशियंसी पर भी उतना ही ध्यान दिया जा रहा है। एक्टिव स्क्रीन के बाद अब लोकप्रियता का अगला स्तर फ्लैक्सीबल डिस्प्ले होगा। इसी के चलते कंपनियां एमोलेड डिस्प्ले को ज्यादा बढ़ावा दे रही हैं।'
जानें कितने तरह की होती हैं स्मार्टफोन स्क्रीन - 
TFT LCD: यह डिस्प्ले यूनिट काफी कॉमन है। इसे कई मोबाइल फोन्स में इस्तेमाल किया जाता है। यह डिस्प्ले बेहतर इमेज क्वालिटी और हाई-रेजोल्यूशन देने में सक्षम है। लेकिन धूप में TFT LCD डिस्प्ले साफ दिखाई नहीं देता है। इन्हें ज्यादातर बजट फोन्स और फीचर फोन्स में ही इस्तेमाल किया जाता है।
IPS-LCD: यह डिस्प्ले बजट से ऊपर के स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल किया जाता है। अगर इसकी तुलना TFT डिस्प्ले से की जाए तो IPS LCD फोन में वाइड एंगल व्यू जैसे अनुभव देता है। साथ ही बैटरी की भी कम खपत होती है। इसका हाई-रेजोल्यूशन 640 x 960 पिक्सल है।
Resistive Touchscreen LCD: टचस्क्रीन LCD डिस्प्ले दो तरह के होते हैं। पहला Resistive और दूसरा Capacitive. Resistive टचस्क्रीन में कंडक्टीव मैटेरियल की दो परत दी गई हैं। जब यूजर द्वारा डिस्प्ले को छुआ जाता है तो ये दोनों परत आपस में मिलती हैं और सर्किट बनाती हैं और ऐसे ही यह स्क्रीन काम करती है।
Capacitive Touchsceen LCD: इसमें ट्रांसपेरेंट कंडक्टर के साथ ग्लास की लेयर दी गई होती है। जब इस स्क्रीन को टच किया जाता है तो स्क्रीन की इलेक्ट्रोस्टैटिक फील्ड में रुकावट आती है जिसे फोन का प्रोसेसर डिटेक्ट करता है और फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम को एक्शन को परफॉर्म करने के लिए निर्देश देता है। Resistive स्क्रीन के मुकाबले यह स्क्रीन ज्यादा रिस्पॉन्सिव है। इसे ज्यादातर हाई-एंड स्मार्टफोन्स में इस्तेमाल किया जाता है।
OLED: यह मोबाइल और मॉनिटर्स में लगने वाली नई तकनीक से लैस डिस्प्ले है। इस डिस्प्ले में ग्लास टॉप प्लेट और ग्लास बॉटम प्लेट के बीच में ऑरगैनिक मैटेरियल की परत दी गई होती है। जब इन दोनों परतों पर इलेक्ट्रिक पल्स लगाई जाती है तो ऑरगैनिक मैटेरियल से इलेक्ट्रो-ल्यूमिनेससेंट लाइट उत्पन्न होती है। इस पर ही स्क्रीन की ब्राइटनेस और कलर निर्भर होते हैं।
AMOLED: यह डिस्प्ले OLED का ही एक प्रकार है। AMOLED में OLED डिस्प्ले की सभी खासियतें जैसे कलर रिप्रोडक्शन, बेहतर बैटरी लाइफ, हाई ब्राइटनेस और शार्पनेस होती हैं। मौजूदा समय में AMOLED डिस्प्ले का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। नोकिय 8 जैसे हाई एंड स्मार्टफोन्स में यह डिस्प्ले दी जा रही है।
Super AMOLED: यह डिस्प्ले AMOLED का ही एडवांस वर्जन है। इसमें टच सेंसर इन बिल्ट होते हैं। मार्किट में मौजूद यह सबसे पतली डिस्प्ले तकनीक है। यह AMOLED डिस्प्ले से कहीं ज्यादा रिस्पॉन्सिव है।
Retina Display: रेटीना डिस्प्ले एक ऐसी टर्म है जो ऐपल ने हाई रेजोल्यूशन (640 x 960) आईपीएस एलसीडी के लिए इस्तेमाल की थी जिसे iPhone4 में इस्तेमाल किया जाता है। इसे रेटीना डिस्प्ले इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके पिकसल्स को व्यक्ति द्वारा पहचाना नहीं जा सकता है।
Haptic/Tactile touchscreen: इस तरह की स्क्रीन का इस्तेमाल ब्लैकबैरी और नोकिया के टचस्क्रीन स्मार्टफोन्स में किया जाता है। यह डिस्प्ले यूजर के परफॉर्मेंस अनुभव और एक्यूरेसी को बेहतर बनाता है।
Gorilla Glass: यह एक अलग तरह का alkali-aluminosilicate ग्लास शील्ड है जिसे डैमेज रेसिस्टेंस बनाया गया है। यह मोबाइल डिस्प्ले को स्क्रैच, टूटने आदि दिक्कतों से बचाता है। कई फोन निर्माता कंपनियां जैसे मोटोरोला, सैमसंग और नोकिया अपने स्मार्टफोन्स को बेहतर बनाने के लिए Gorilla Glass का इस्तेमाल कर रही हैं।
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बाल दिवस छोड़ गूगल ने होल पंचर पर बनाया अपना डूडल - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 15, 2017
बाल दिवस छोड़ गूगल ने होल पंचर पर बनाया अपना डूडल - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

14 नवंबर को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिल बाल दिवस के रूप में देशभर में मनाया जा रहा है। लेकिन गूगल ने अपने डूडल में इसे जगह देने की बजाय होल पंचर को दी है। दरअसल आज 131 साल पहले रोजमर्रा के काम आसान बनाने वाले होल पंचर की खोज हुई थी।
1886 में फ्रेडरिक सोइनेकल ने इसका अविष्कार किया था। फ्रेडरिक के जर्मन अफसर थे और ब्लैकस्मिथ के बेटे थे। उन्होंने 1875 में अपनी कंपनी की स्थापना की थी। 14 नवंबर के दिन जहां लोगों को उम्मीद थी कि गूगल पिछले साल की तरह इस बार भी चाचा नेहरू को लेकर कोई डूडल बना सकता है वहीं गूगल ने गूगली करते हुए होल पंचर पर डूडल बना दिया।
पिछले साल गूगल ने आज के दिन एक प्रतियोगिता करवाई थी जिसमें पुणे की लड़की को विजेता घोषित किया था। वैसे आपको बता दें कि शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब गूगल ने किसी छोटी मशीन का डूडल बनाया हो। अविष्कार के बाद से लेकर आज तक इस होल पंचर में कई बदलाव हुए हैं और यह अब देश दुनिया के हर दफ्तर में नजर आने लगा है।
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Tuesday, November 14, 2017

जीपीएस सिग्नल में आ रही समस्या को ऐसे करें दूर - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 14, 2017
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आज आप कहीं भी निकलते हैं, तो रास्ते में रुककर किसी से पता पूछने के बजाय मोबाइल पर जीपीएस का सहारा लेना ज्यादा पसंद करते हैं। जीपीएस का उपयोग करने के दौरान आपको यह डर नहीं होता कि कोई आपके गंतव्य की गलत जानकारी दे देगा। आप घर से निकलने के साथ ही पूरा पता और नक्शा अपने फोन पर सर्च कर लेते हैं, जिससे कि आपका फोन हर छोटे-बड़े मोड़ और रास्तों की जानकारी देता रहे। इतना ही नहीं, आज फोन में कई एप्लिकेशंस हैं, जो लोकेशन सर्विस का उपयोग करते हैं।
ऐसे में यदि जीपीएस सिग्नल में थोड़ी भी परेशानी हो, तो आपके लिए बड़ी मुश्किल हो जाती है। जानिए कैसे जीपीएस सिग्नल को बेहतर किया जा सकता है।
यह है जीपीएस - 
जीपीएस का आशय है ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम। यह तकनीक आपकी उपस्थिति को बताती है, जैसे आप कहां हैं और किस दिशा में बढ़ रहे हैं आदि। जीपीएस तकनीक का विकास सबसे पहले अमेरिकी सेना द्वारा किया गया था। वर्ष 1973 में अमेरिकी थलसेना ने इसे नौसेना के लिए बनाया था लेकिन 1995 में इस सेवा को आम उपभोक्ताओं के लिए भी पेश कर दिया गया।
स्मार्टफोन में जीपीएस : स्मार्टफोन में जीपीएस के लिए एक सेंसर लगा होता है। यह सेंसर अंतरिक्ष में स्थापित जीपीएस से कम्युनिकेशन कर आपकी उपस्थिति को बताता है। इस सेंसर को फोन में लगे अन्य हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर द्वारा कंट्रोल किया जाता है। ऐसे में कभी-कभी जीपीएस सिग्नल में समस्या आ जाती है। इस स्थिति में यहां दिए गए तरीके से इसका समाधान किया जा सकता है।
पता करें जीपीएस की परेशानी : यदि आपके फोन के जीपीएस में कोई भी समस्या है, तो उसका भी पता लगा सकते हैं। हालांकि इसके लिए फोन में जीपीएस इसेंशियल डाउनलोड करना होगा। इससे जीपीएस में समस्या कमजोर सिग्नल की वजह से है या फिर हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर की वजह से, इसकी जानकारी मिल जाएगी। ऐप मेन्यू में सैटेलाइट का विकल्प मिलेगा। उस पर क्लिक करने से फोन सैटेलाइट से कनेक्ट हो जाएगा। यदि फोन सैटेलाइट से कनेक्ट नहीं हो रहा है, तो इसका मतलब है कि फोन के आसपास कोई मैटेलिक वस्तु है, जो सिग्नल को रोक रही है।
यह स्मार्टफोन केस या फिर कुछ भी हो सकता है। ऐसे में फोन केस से हटाएं। यदि सैटेलाइट सही दिखा रहा है, लेकिन जीपीएस सही तरह से कार्य नहीं कर रहा है, तो समझें कि यह सॉफ्टवेयर की समस्या है। 
जीपीएस डाटा को करें रिफ्रेश : कभी-कभी सैटेलाइट सिग्नल न होने की वजह से भी फोन का जीपीएस फ्रीज हो जाता है। ऐसी स्थिति में फोन में जीपीएस स्टेटस या टूलबॉक्स जैसे ऐप्स डाउनलोड कर सकते हैं। ये फोन के जीपीएस डाटा को क्लियर कर उसे फिर से सैटेलाइट से कनेक्ट करने में सक्षम बनाते हैं।


जीपीएस को रखें हाई एक्यूरेसी मोड पर : कई बार लोग फोन में बैटरी की खपत को कम करने के लिए जीपीएस सिग्नल को हाई एक्यूरेसी मोड से हटा देते हैं। बैटरी बचाने के लिए तो यह सही है लेकिन इससे कभी-कभी जीपीएस सटीक जानकारी नहीं देता। यदि कभी लोकेशन सर्च के दौरान आपको लगता है कि जीपीएस सही तरह से कार्य नहीं कर रहा है, तो उसे हाई एक्यूरेसी पर ही रखें। हाई एक्यूरेसी का विकल्प आपको फोन की सेटिंग्स में जाकर लोकेशन में मिलेगा।
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Monday, November 13, 2017

अब इस मोबाइल ऐप के जरिये मरीज घर बैठे ले पाएंगे डॉक्‍टरी सलाह - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 13, 2017
अब इस मोबाइल ऐप के जरिये मरीज घर बैठे ले पाएंगे डॉक्‍टरी सलाह - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के विशेषज्ञों ने एक ऐसी ऐप तैयार की है जिससे देश या विदेश में बैठे लोग दिल्ली के डॉक्टर्स से परामर्श ले पाएंगे। इस ऐप का नाम My Follow Up है। इस ऐप पर मरीज अपनी क्लीनिकल रिपोर्ट अपलोड कर सकेंगे। साथ ही किफायती शुल्क पर सलाह भी ले पाएंगे।
एक बार डॉक्टर से मिलना होगा जरुरी - 
आपको बता दें कि मरीज जिस बीमारी का इलाज करा रहा है अगर उसे शारीरिक परीक्षण की जरुरत है तो इसके लिए उन्हें एक बार डॉक्टर से मिलना आवश्यक होगा।
गंगाराम अस्पताल में डिपोर्टमेंट आफ मिनिमल एक्सेस एंड बारियाट्रिक सर्जरी सेंटर के को-चेयरमैन डॉ. सुधीर कल्हान ने कहा, 'एक डॉक्टर और एक मरीज के बीच संबंध विश्वास का होता है। हमें इलाज और मरीज के इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। हमने ऐसे मरीजों की कई सर्जरी की हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं लेकिन अब उन्हें सर्जरी के बाद के इलाज के लिए शारीरिक रूप से मौजूद रहने की जरूरत नहीं है।'

इस ऐप को अभी तक करीब 5 हजार लोगों ने डाउनलोड किया है। वहीं, यहां सर गंगाराम अस्पताल के 200 से ज्यादा डॉक्टर प्रीएप्रूव्ड ऑनलाइन अप्वाइंमेंट के लिए उपलब्ध हैं।
गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद हैं कई अन्य एप्स - 
My Follow Up ऐप के अलावा गूगल प्ले स्टोर पर कई अन्य एप्स भी उपलब्ध हैं जिनकी मदद से मरीज डॉक्टर्स से परामर्श ले सकते हैं। इनमें Practo, Doctor On Demand और DocsApp शामिल हैं। इनके अलावा कई ऐसी एप्स भी हैं जिनपर मरीज का prescription अपलोड कर कम कीमत में दवाइयां खरीदी जा सकती हैं। इनमें Netmeds काफी लोकप्रिय ऐप है।
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अपने कर्मचारियों को ऐसे दिलचस्प भत्ते देता है फेसबुक - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 13, 2017
अपने कर्मचारियों को ऐसे दिलचस्प भत्ते देता है फेसबुक - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

हर किसी की तमन्ना होती है कि वो किसी ऐसी कंपनी में काम करे जहां पर उसे सैलरी और अन्य फायदों के साथ-साथ कुछ ऐसी सुविधाएं भी मिलें जो काम करने के माहौल को खुशनुमा बना दें। फेसबुक का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में एक ऐसी ही कंपनी की छवि उभरती है, है न?
फेसबुक काम करने के लिहाज से बेशक एक उम्दा जगह है। मगर, ये कंपनियां बतौर भत्ते अपने कर्मचारियों को कुछ ऐसी पेशकश भी करती हैं जिन्हें सुनकर आपको हैरानी हो सकती है। हम आपको अपनी इस खबर के माध्यम से बताने जा रहे हैं कि फेसबुक कार्यस्थल (ऑफिस) में अपने कर्मचारियों को किस किस तरह के भत्ते प्रदान करता है...
फेसबुक के मेनलो पार्क स्थित कार्यालय में मिलती हैं ड्राई क्लीनिंग सेवाएं
मेनलो पार्क हेडक्वार्टर में इलेक्ट्रिक कारों के लिए निःशुल्क चार्जिंग स्टेशन के साथ निजी सेवक भत्ता
ऑफिस में ही स्वास्थ्य और दंत चिकित्सा सेवाएं
मेनलो पार्क स्थित कार्यालय में ऑन-साइट नाई की दुकान की उपलब्धता
पूरे दिन में मुफ्त में भोजन और स्नैक्स की उपलब्धता
बच्चा गोद लेने के लिए वित्तीय सहायता के साथ साथ नए बच्चे के लिए 4000 डॉलर का बेबी कैश
मेनलो पार्क में श्रमिकों के लिए वीडियो गेम से भरा आर्केड
पूर्णकालिक कर्मचारियों के लिए 21 दिनों का पेड वैकेशन

जिम सदस्यता या अन्य स्वास्थ्य गतिविधियों के लिए एक वेलनेस भत्ता
मेनलो पार्क कर्मचारियों के लिए एक बाइक की मरम्मत की दुकान
हाल ही में माता-पिता बने कर्मचारियों के लिए 4 महीनों का पेड-ऑफ (बच्चे के जन्म लेने और गोद लेने के पहले साल)
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सड़क किनारे मिलने वाले सस्ते इयरफोन से करें तौबा, वर्ना हो जाएंगे बहरे - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 13, 2017
सड़क किनारे मिलने वाले सस्ते इयरफोन से करें तौबा, वर्ना हो जाएंगे बहरे - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

हम में से अधिकांश लोग महंगे इयरफोन नहीं खरीदते हैं। ज्यादातर लोग सड़क के किनारों पर लगी दुकानों से सस्ते हेडफोन या इयरफोन खरीद लेते हैं। आखिर कोई क्यों ब्रांडेड इयरफोन पर 400-500 या इससे ज्यादा रुपए खर्च करना चाहेगा, जबकि सड़क किनारे से यह 50 या 100 रुपए में मिल रहा है।
उनकी साउंड क्वालिटी भी इतनी खराब नहीं है। मगर, यदि आप चाहते हैं कि आप बहरेपन का शिकार नहीं हों और लंबे समय तक आपके सुनने की क्षमता अच्छी बनी रहे, तो आपको महंगे इयरफोन पर निवेश करना चाहिए। आज हम आपको बताएंगे कि सस्ते इयरफोन से आपको क्या परेशानी हो सकती हैं...
Distortion
स्ट्रीट साइड इयरफोन में आमतौर पर बहुत अधिक डिस्टॉर्शन होता है। यानी सीधी भाषा में कहें, तो आप जो आवाज सुनना चाहते हैं, वह साफ नहीं सुनाई देती है। इसके लिए आप गाने का वॉल्यूम तेज कर देते हैं, ताकि आपको आवाज साफ सुनाई दे। मगर, तेज आवाज से आपके कान के पर्दे स्थायी रूप से खराब हो सकते हैं और इसका नतीजा आपके सुनने की क्षमता पर पड़ता है। आवाज सुनने की अधिकतम सीमा 85 डेसिबल है। लिहाजा, जब आप इससे तेज आवाज में लंबे समय तक गाना सुनते हैं, तो आपके सुनने की क्षमता खराब हो जाती है।
Unequal Amplification
सस्ते इयरफोन गाने की पिच और वॉल्यूम को समान रूप से नहीं बढ़ाते हैं। यानी गाने की पिच और वॉल्यूम अचानक से बढ़ सकती है, जिससे आपके सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। एमपी3 प्लेयर के साथ सड़क के किनारे मिलने वाले औसत दर्जे के इयरफोन की आवाज 115 डेसिबल तक जा सकती है। रोजाना 15 मिनट तक इतनी तेज आवाज में गाने सुनने से कान में स्थाई रूप से क्षति हो सकती है।
Bad Fit
सस्ते इयरफोन बनाने वाले इसके उत्पादन में अधिक समय और मेहनत नहीं करते हैं। इनकी फिटिंग भी खराब होती है। लिहाजा आवाज को साफ सुनने के लिए आपको आवाज तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जो लंबे समय में आपके सुनने की क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित करती है। ऐसे में उम्मीद है कि बेहतरीन आवाज सुनने के लिए आपको अच्छे इयरफोन खरीदने चाहिए।
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Saturday, November 11, 2017

गूगल ने बनाया मजदूरों के हक के लिए लड़ने वाली अनसूया साराभाई का डूडल - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 11, 2017
गूगल ने बनाया मजदूरों के हक के लिए लड़ने वाली अनसूया साराभाई का डूडल - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

जानीमानी सामाजिक कार्यकर्ता अनसूया साराभाई का शनिवार को 132वां जन्मदिन है और इस मौके पर गूगल ने उनका डूडल बनाकर श्रद्धांजलि दी है। अनसूया ने बुनकरों और टेक्स्टाइल उद्योग के मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने 1920 में मजूर महाजन संघ की स्थापना की थी जो भारत के टेक्स्टाइल मजदूरों का सबसे बड़ा पुराना यूनियन है।
अनसूया का जन्म 11 नवंबर, 1885 को अहमदाबाद में हुआ था। उनके पिता का नाम साराभाई और माता का नाम गोदावरीबा था। जब वह 9 साल की थीं तो उनके माता-पिता का देहांत हो गया। फिर उनके भाई अंबालाल और छोटी बहन को एक चाचा के पास रहने के लिए भेज दिया गया।
13 साल की उम्र में उनका विवाह कर दिया गया लेकिन उनका वैवाहिक जीवन सफल नहीं रहा। भाई की मदद से वह 1912 में मेडिकल की डिग्री लेने के लिए इंग्लैंड चली गईं लेकिन बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में चली गईं। इस दौरान उनकी मुलाकात जॉर्ज बरनार्ड शॉ, सिडनी वेब्ब जैसे लोगों से हुई, जिन्होंने मार्क्सवाद के क्रांतिकारी सिद्धांतों को सिरे से खारिज कर समाजवादी समाज की सिफारिश की थी। इन लोगों से मुलाकात के बाद अनसूया ने समाजिक समानता जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अपनी सेवा दी।
भारत लौटने के बाद उन्होंने एक स्कूल खोला। जब उन्होंने 36 घंटे की शिफ्ट के बाद थककर चूर हो चुकी मिल की महिला मजदूरों को घर लौटते देखा तो उन्होंने मजदूर आंदोलन करने का फैसला लिया।914 में उन्होंने मजदूरों को संगठित करने में मदद की और फिर 1918 में मजदूरों के हित के लिए एक महीने तक हड़ताल चली, जिसमें वे खुद भी शामिल थीं।
टेक्सटाइल मजदूर अपनी मजदूरी में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे क्योंकि उन्हें केवल 20 प्रतिशत दिया जा रहा था। इसके बाद गांधी जी ने भी मजदूरों की ओर से हड़ताल करना शुरू कर दिया और मजदूरों को 35 फीसदी बढ़ोतरी मिली। इसके बाद 1920 में मजदूर महाजन संघ की स्थापना हुई। इन्हें लोग मोटाबेन कहकर बुलाते था। अनसूया का निधन 1972 में हुआ।
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आधार से मोबाइल नंबर लिंक नहीं तो पटवारी की उम्मीदवारी खत्म - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 11, 2017
आधार से मोबाइल नंबर लिंक नहीं तो पटवारी की उम्मीदवारी खत्म - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पूर्व का व्यापम) के नए नियम ने पटवारी बनने के इच्छुक हजारों उम्मीदवारों को निराश कर दिया है। पहली बार प्रदेश में पटवारी के करीब सवा दो हजार पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हुआ है। मोबाइल नंबर आधार कार्ड से लिंक नहीं होने पर परीक्षा के आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं।
शुक्रवार को पटवारी के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख थी। इस दौरान मोबाइल-आधार लिंक की परेशानी के चलते प्रदेश के हजारों उम्मीदवार आवेदन जमा करने से वंचित रहे गए। उम्मीदवारों के अनुसार ऐसे कई लोग हैं जिनका आधार कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर बदल चुका है या फिर उन्होंने हाल ही में ईकेवायसी करवा कर उसे लिंक नहीं करवाया है।
गांवों के ऐसे कई निर्धन और महिला उम्मीदवार हैं जिनके पास अपना मोबाइल नहीं है। परिवार के अन्य सदस्यों के मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं, ऐसे तमाम लोग आवेदन जमा नहीं कर सके हैं। उम्मीदवारों के मुताबिक आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर पर पीईबी वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भेजता है। ऐसे में छूट होना चाहिए कि आवेदक अपने पास उपलब्ध मोबाइल नंबर लिख सके।

तारीख बढ़ाने की मांग
आधार और मोबाइल लिंक के अजीब नियम के बाद आधार पंजीयन सेंटरों और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडरों के यहां अभ्यर्थियों की भीड़ लग गई है। इसके बावजूद काम नहीं हो पा रहा है। अधर में लटके अभ्यर्थी पीईबी से नियम में राहत देने और आवेदन जमा करने की तारीख बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
अनिवार्य किया गया
परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य किया गया है। जिन लोगों ने आधार से अपना मोबाइल लिंक नहीं किया है, उन्हें फॉर्म भरने में परेशानी आ रही है। हमारे स्तर से कोई तकनीकी समस्या नहीं है। -एसके भदौरिया, परीक्षा नियंत्रक, पीईबी
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Friday, November 10, 2017

अनोखा ऐप, दादा-दादी को याद दिलाएगा दवा लेने का समय - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 10, 2017
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अब बुजुर्गों को अपनी दवाई का क्रम याद रखने की आवश्यकता नहीं है। उनकी रोजाना की दवा का पूरा शिड्यूल याद दिलाने के लिए एक नया मोबाइल एेप्लीकेशन ‘दवाई दोस्त’ शुरू हुआ है।
एेप को इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि यह बुजुर्गों को अपनी दवा लेना भूलने नहीं देता। इस एेप को आर्यमन कुंजरू ने डिजाइन किया है।
एेप को बनाने की प्रेरणा उन्हें अपने परिवार के ही बुजुर्ग सदस्य से मिली, जिनके लिए टेक्नोलॉजी और टच स्क्रीन का इस्तेमाल काफी चुनौती भरा था।
दवाई दोस्त की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इस्तेमाल करने वाले को वॉयस नोटिफिकेशन के जरिये दवा लेने की याद दिलाता है।


इस वॉयस नोटिफिकेशन को विभिन्न भारतीय भाषाओं में तैयार किया जा रहा है। अभी यह तमिल और हिंदी में उपलब्ध है, मगर जल्दी ही अन्य भाषाओं में भी इसे लाया जा रहा है।
एेप में इस बात की भी सुविधा है कि इसे इस्तेमाल करने वाला अपनी दवा की फोटो भी डाल सकता है या फिर दवा का ब्योरा डालकर उसे लेने का वक्त फोन में डाल सकता है।
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सड़क हादसा होते ही परिवार और पुलिस को सूचना देगा मोबाइल ऐप - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 10, 2017
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मैकेनिकल इंजीनियर भारतभूषण ने वाहनों के लिए एक्सीअलर्ट मोबाइल ऐप तैयार किया है। यह ऐप वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूरत में चालक के परिजनों, नजदीकी अस्पताल और पुलिस कंट्रोल रूम को सूचित कर देगा, जिससे मदद मिलने में आसानी होगी। इस ऐप को भारत सरकार से पेटेंट भी करवाया जा चुका है।
उल्लेखनीय है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देश में हर घंटे 16 लोग सड़क दुर्घटना में जान गंवाते हैं। इनमें आधे लोगों की मौत समय पर इलाज ना मिलने से होती है। ऐसे लोगों को बचाने में यह ऐप काफी सहायक होगा।
फरीदाबाद के सेक्टर-28 निवासी मैकेनिकल इंजीनियर भारतभूषण के अनुसार मोबाइल में ऐप को इंस्टॉल करते समय चालक को अपने नाम, पते, ब्लड ग्रुप, रिश्तेदारों व दोस्तों के मोबाइल नंबरों की जानकारी देनी होती है। वाहन में एक्सीडेंट सेंसर लगाकर ऐप से जोड़ा जाता है। हादसे की सूरत में सेंसर ऐप को चालू कर देंगे। इससे ऐप से जुड़ा बीप सिस्टम आवाज करेगा।
कैसे काम करता है यह ऐप-
इसमें यदि चालक होश में है तो वह बीप को बंद करके ऐप को वहीं रोक देगा। अगर 30 सेकेंड तक चालक बीप बंद नहीं करता है तो ऐप उसके दोस्तों-रिश्तेदारों के मोबाइल पर रिकॉर्डेड कॉल करेगा। हादसे की लोकेशन के साथ संदेश भेजेगा, जिसमें आस-पास अस्पतालों और उनके नंबर भी होंगे। अस्पतालों और पुलिस कंट्रोल रूम को भी हादसे की रिकॉर्डेड कॉल जाएगी। साथ ही बताया जाएगा कि एक्सीअलर्ट साइट पर जाकर हादसे की लोकेशन प्राप्त कर सकते हैं।


चार साल में विकसित किया ऐप-
भारतभूषण को यह ऐप विकसित करने में चार साल का समय लगा है। इसे सभी वाहनों में लगाया जा सकता है। करीब 50 कार चालक इसे लगवा चुके हैं।
'हादसा होने के बाद पहला एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर इस दौरान इलाज मिल जाए तो जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। रात में, कोहरे के दौरान या सुनसान जगहों पर हादसा होने पर यह ऐप किसी फरिश्ते से कम नहीं होगा।' -भारतभूषण, मैकेनिकल इंजीनियर
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Wednesday, November 8, 2017

कम रोशनी में खींचना चाहते हैं अगर बेहतर फोटो तो करें इन TIPS को फॉलो - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 08, 2017
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आजकल स्मार्टफोन कंपनियां यूजर्स बेहतर पिक्चर क्लिक कर सकें, इसे लेकर स्मार्टफोन के कैमरे में लगातार बदलाव करती रहती हैं। इसके बाद भी कई मोबाइल फोन रात के वक्त( लो लाइट) में अच्छी तस्वीरें नहीं खींच पाते हैं।
हम आपको कुछ ऐसी टिप्स देने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप लो लाइट में भी बेहतर फोटो खींच सकेंगे।
HDR को रखें ऑन-
रात में फोटो खींचते समय HDR फीचर को ऑन करें। यह फीचर लाइट को बैलेंस कर बेहतर फोटो क्लिक करने में मदद करता है।
ISO को ऐसे करें एडजस्ट-
यह फीचर आपको लगभग हर स्मार्टफोन में मिल जाएगा। इसके जरिए लो लाइट में बेहतर फोटो ली जा सकती हैं। बस फोटो खींचते समय इसे एडजस्ट करना पड़ता है। अगर आप ISO को बढ़ाकर फोटो खींचते हैं, तो फोटो अच्छी आएगी।
फ्लैश लाइट को करें ऑफ-
लो लाइट में फोटोग्राफी करते समय फ्लैश लाइट को बंद रखें। कई बार कैमरे की फ्लैश लाइट इतनी बुरी होती है कि फोटो अच्छी आने की जगह खराब हो जाती है। ऐसे में कोशिश करें कि फोटो खींचते समय फ्लैश लाइट को ऑफ ही रखें या जरुरत पड़ने पर ही इसका इस्तेमाल करें।
कैमरा ऐप का भी कर सकते हैं इस्तेमाल-
फोन के इन-बिल्ट कैमरा ऐप के अलावा आप दूसरे कैमरा ऐप भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इनकी मदद से फोटोज बेहतर आती हैं।
ब्लैक और व्हाइट का करें इस्तेमाल-
लो लाइट में फोटोग्राफी करते समय ब्लैक एंड व्हाइट फिल्टर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे फोटो बेहतर आएंगी।
ऐसी होती है HDR क्वालिटी-
HDR का मतलब High dynamic range है। यह तस्वीरों के कलर को बेहतर बनाता है। इस मोड के जरिए अगर कोई फोटो ली जाए तो यह रोशनी को ज्यादा बारीकी से कैप्चर करता है।
फोटोज लेने के लिए यह मोड तीन तस्वीरों का प्रयोग करता है, जिसे अलग-अलग एक्सपोजर पर कैप्चर किया जाता है। इसके बाद इसे जोड़कर एक फोटो बना दी जाती है।
अगर आप ज्यादा बारीकी से इसे समझना चाहते हैं, तो अपने फोन से HDR मोड के साथ और बिना HDR के फोटो लें। आपको इसका अंतर साफ दिखाई दे जाएगा।
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Tuesday, November 7, 2017

रेलवे की योजना, ऐप बताएगा रेल टिकट कंफर्म होगा या नहीं - सौरभ कुमार श्रीवास्तव

November 07, 2017
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भारतीय रेलवे एक ऐसा ऐप लाने पर काम कर रही है जिसके जरिये ये पता चल सकेगा कि वेटिंग टिकट के कंफर्म होने की कोई संभावना है या नहीं। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि रेल मंत्री पीयूष गोयल ने यह सुझाव दिया था।
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता अनिल सक्सेना ने बताया, ये पूवार्नुमान पिछले 13 सालों के यात्री ऑपरेशन और बुकिंग पैटर्न डेटा पर आधारित होगा।
उन्होंने आगे कहा कि सीआरआईएस (रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र) रेलवे के लिए यह मिश्रित एप्लीकेशन विकसित कर रहा है जहां एक उपयोगकर्ता को रेलवे की वेबसाइट और ऐप पर टिकट बुक करते वक्त वेटिंग टिकट की पुष्टि होने की संभावना के बारे में सूचित किया जाएगा।
रेलवे के मुताबिक, सभी श्रेणियों में उपलब्ध 10.5 लाख बर्थ के लिए हर दिन लगभग 13 लाख टिकट बुक किए जाते हैं।
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